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नये साल की भोली शिशु सम ,
मधुर निराली भोर
प्यारी व चित चोर।

सुबह सवेरे पंछी जगते,
अलसाई गति से पग धरते
नापें गगन का छोर।
मधुर निराली भोर,
प्यारी व चित चोर।

अँखियाँ काजल वारी कारी
बरसावें मधु कभी दें गारी,
चमकें नई नकोर।
मधुर निराली भोर,
प्यारी व चित चोर।

मनहर दिन मदमाती रातें
मधुकर की मनमोहक बातें,
कलियाँ हुईं विभोर
मधुर निराली भोर,
प्यारी व चित चोर।

ओस लपेटे भीगी गात लिए,
सतर खड़े कुछ मुँह में बात लिए,
तरूवर लिए हिलोर।
मधुर निराली भोर,
प्यारी व चित चोर।

आज नया दिन नये वेश में,
रोटी कपड़ा मिले देश में,
मिले सभी को ठौर
प्यारी व चित चोर।
मधुर निराली भोर,
प्यारी व चित चोर।

मन्दिर,मस्जिद,गुरुद्वारे में,
हर एक गली में अंगनारे में,
खुशहाली चहुँओर ।
मधुर निराली भोर,
प्यारी व चित चोर।

नन्हे शिशु सा सूरज झाँके,
कभी चाँद की दिखतीं फाँकें
शीत का फैला जोर।
मधुर निराली भोर,
प्यारी व चित चोर।

खुष्क पड़े मौसम की रंगत
उस पर मँहगाई की संगत।
झंझा हैं झकझोर।
मधुर निराली भोर,
प्यारी व चित चोर।
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Mamta on January 2, 2016 at 4:25pm
आदरणीय समीर साहब आपकी हौसला अफजाई का शुक्रिया!
सादर ममता
Comment by Samar kabeer on January 2, 2016 at 2:52pm
मोहतरमा ममता जी आदाब,बहुत सुंदर गीत लिखा है आपने,दिल से बधाई स्वीकार करें |
Comment by Mamta on January 2, 2016 at 12:46pm
आदरणीया प्रतिभाा पांडे जी आपके स्नेह युक्त भावों के लिए धन्यवाद!
सादर ममता
Comment by Mamta on January 2, 2016 at 12:43pm
आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी साहब तहेदिल से शुक्रिया!
सादर ममता
Comment by pratibha pande on January 2, 2016 at 9:59am

 नये साल का   स्वागत  सुन्दर गीत के साथ , हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीया ममता जी 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 2, 2016 at 9:02am
प्यारी निराली भोर के सभी पहलुओं को बख़ूबी चित्रित करते हुए सुंदर गीत की प्रस्तुति के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीया ममता शर्मा जी ।
Comment by Mamta on January 2, 2016 at 9:00am
आदरणीय दूबे जी ,आपको मेरा लिखा भाया लिखना सार्थक हुआ।
ह्रदय तल से आभार।
सादर ममता
Comment by Hari Prakash Dubey on January 1, 2016 at 7:26pm

सुन्दर  रचना आ. ममता जी , बधाई एवम् नववर्ष की शुभकामनायें !

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