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गजल/धूप
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1222 1222 1222 1222

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करो  तय दोस्तो  थोड़ा  जिगर में  धूप का होना
मिटा सीलन को देता है कि घर में धूप का होना /1

दुआ मागी थी रिमझिम में जरा सी धूप तो दे दो
अखरता क्यों तुझे  है अब डगर में धूप का होना /2

जहाँ  देखो  वहीं  जलवा  करें  साए  इमारत के
पता चलता किसे है अब नगर में धूप का होना /3

चलो आँगन में रख आए चटखती हड्डियों को अब
जरूरी   है  बुढ़ापे   की   उमर  में   धूप   का  होना /4

करो उम्मीद मिल जाए सरों की सीध में सूरज
पता देता है साहस का सफर में धूप का होना /5

हटाओ चिलमनों को अब घरों से औ दिमागों से
तबीयत साज  रखता है  सहर में धूप का होना /6

चलो कुछ देर बैठें अब किनारे झील के यारो
समा रंगीन करता  है असर में धूप का होना /7


**********************************************
मौलिक व अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 16, 2016 at 11:06am

आ० भाई आपकी सलाह सर आखों पर .आगे प्रयास रहेगा की इस तरह का दुहराव न हो l

Comment by Samar kabeer on March 14, 2016 at 6:02pm
में सिर्फ़ इतना अर्ज़ कर रहा था कि सही शब्द "उम्र"है, यहाँ लेने से ज़ाहिर है शैर लय से भटक जायेगा ।
प्रचलित शब्दों को ग़ज़ल में बरतने का आजकल बहुत ज़ोर है, और ले भी सकते हैं,लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि हम ग़ज़ल में जिस भाषा का भी शब्द रखे उसके सही तलफ़्फ़ुज़ के साथ रखें,नहीं तो ये आदत बन जाती है ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2016 at 10:59am

आ0 भाई राहुल जी , गजल की प्रशंसा के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2016 at 10:59am

आ0 भाई समर जी, आपकी उपस्थिति और स्नेह से मन को अति प्रसन्नता हुई । समर भाई चैथे शैर में उमर को अपभ्रश के तौर पर ही लेकर प्रयोग किया गया है क्यों कि तत्सम शब्द के तौर पर प्रयोग से लय और बहर दोनो बाधित हो रही हैं । क्या प्रचलित शब्दों का प्रयोग गजल में नहीं किया जा सकता ? इस संदर्भ में मार्गदर्शन करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2016 at 10:58am

आ0 भाई सतविन्द्र जी गजल का मान बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2016 at 10:58am

आ0 भाई बृजेश जी गजल की प्रशंसा और स्नेह के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2016 at 10:58am

आ0 भाई रामबली जी, उपस्थिति से गजल का मान बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2016 at 10:58am

आ0 वर्षा जी गजल पर उपस्थित हो मान बढ़ाने के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2016 at 10:57am

आ0 भाई नरेंद्र जी, गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 14, 2016 at 10:57am

आ0 भाई  आमोद बिन्दौरी जी, गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

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