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मौत ही रास्ता नहीं होता (ग़ज़ल 'राज ')

२१२२ १२१२ २२

हुस्न गर  बावफ़ा नहीं होता,

दिल कभी आशना नहीं होता

 

खेलना दिल से तोड़ देना फिर

ये कोई  कायदा नहीं होता

 

दिल्लगी से हुए तमाशे का

हर कहीं तज़करा नहीं होता

 

जान पाता कभी नहीं उसको

,मैं अगर आइना नहीं होता 

 

मार देती ये तिश्नगी मुझको,

काश ये मयकदा नहीं होता

 

मुश्किलों से निजात पाने को,

मौत ही रास्ता नहीं होता

 

छेड़ता वो न बारबार इसको,

जख्म मेरा हरा नहीं होता

 

रास्ते हो गए अलग अपने ,

आजकल सामना नहीं होता

 

 भूल जाता मै बेवफाई सब

,काश यूँ सिरफिरा नहीं होता

-----मौलिक एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 25, 2016 at 8:30pm

आ० विजय निकोर जी,ग़ज़ल पर शिर्कत और सुखन नवाजी का बेहद शुक्रिया आप प्रतिक्रिया देते हैं तो अच्छा लगता है |  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 25, 2016 at 8:29pm

आ० रवि शुक्ल भैया,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लेखन कर्म सार्थक हुआ तहे दिल  से बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 25, 2016 at 8:27pm

आ० डॉ० आसुतोष जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ आपने जो शेर कोट किया है उसमे एक व्यथित हारे हुए हृदय के भाव हैं की काश मैं प्यासा ही मर जाता ये मयकदा क्यूँ आ गया बचाने ...शायद मैं अब सपष्ट कर सकी |आपका तहे दिल से आभार |  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 25, 2016 at 8:24pm

आ०  धर्मेन्द्र जी ,ग़ज़ल पर शिरकत और दाद के लिए तहे दिल से शुक्रिया |

Comment by vijay nikore on April 24, 2016 at 4:08pm

 

आपसे एक और खूबसूरत गज़ल मिली। बधाई।

Comment by Ravi Shukla on April 24, 2016 at 3:49pm
आदरणीय राजेश कुमारी जी बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने । दीदी दुसरे शेर में तो हकीकत ही यही है । इसी कायदे से तो कितने शायर अपने अशआर के साथ मशहूर हो गये है । हा हा हा । बढ़िया ग़ज़ल के लिए दिली दाद हाज़िर है । सादर ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 24, 2016 at 2:43pm

आदरणीया राजेश जी ..एक से बढ़कर एक शेर हैं 

मार देती ये तिश्नगी मुझको,

काश ये मयकदा नहीं होता  लेकिन इस शेर को मैं भली भांति नहीं समझ सका ..इस सुंदर रचना पर हार्दिक बधाई सादर 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 24, 2016 at 2:12pm

बहुत ख़ूब आदरणीया राजेश कुमारी जी, अच्छे अश’आर हुए हैं, दाद कुबूल करें।

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