For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हे जग जननी आस तुम्हारा
शब्दों को देती तुम धारा
वाणी को स्वर मिलता तुमसे
कण-कण में है वास तुम्हारा |

दिनकर लेते ओज तुम्ही से
शशि की शीतलता में तुम हो
नभ गंगा की रजत धार में
झिलमिल करता सार तुम्हारा |

सिर पर रख दो वरद हस्त माँ
कलम चले अनवरत मेरी
अंतर्मन के हर पन्ने पर
लिखती हूँ उपकार तुम्हारा ||


मीना पाठक
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 117

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 15, 2016 at 11:00am

आदरणीया मीना पाठक जी सादर, अच्छी प्रार्थना है "हे जग जननी आस तुम्हारा" तुम्हारा या तुम्हारी. देख लें

दिनकर लेते ओज तुम्ही से,......यहाँ "लेते" शब्द भ्रान्ति पैदा कर रहा है. इसे यूँ भी कहा जा सकता है  "दिनकर का है ओज तुम्ही से"

शशि की शीतलता में तुम हो.

Comment by Meena Pathak on May 15, 2016 at 10:07am

जी ..आप बिलकुल सही हैं आ० रामबली जी ..त्रुटियों की तरफ इंगित करने के लिए आभार आप का 

Comment by रामबली गुप्ता on May 14, 2016 at 11:22pm
बहुत ही सुंदर प्रार्थना हृदय से बधाई स्वीकार करें। किन्तु एक संशय है। हर अंतरे की प्रथम दो लाइनों में तुकांतता का निर्वहन नही हो रहा। क्या मैं सही हूँ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज लाली बटाला updated their profile
1 hour ago
राज लाली बटाला commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। हार्दिक बधाई"
1 hour ago
राज लाली बटाला commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"आज की सियासत पर जबरदस्त प्रहार किया है आद गणेश जी बहुत खूब"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"देश के पीड़ित वर्गों और नकारात्मक राजनीति पर रौशनी डालती बेहतरीन ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत…"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं :
"बहुआयामी मार्गदर्शक/विचारोत्तेजक क्षणिकाओं के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सुशील…"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on मेघा राठी's blog post लघुकथा
"बहुत परिश्रम से तैयार की गई बढ़िया प्रतीकात्मक/मानवेत्तर शैली की लघुकथा के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"आ. बागी जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई । "
10 hours ago
मेघा राठी posted a blog post

लघुकथा

नियति का अंतप्लास्टर उतरी दीवारें खुद को अश्लील पोस्टरों में लपेटे कमरे में गुड़ी - मुड़ी पड़ी देह को…See More
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

क्षणिकाएं :

क्षणिकाएं :१. तूफ़ान का अट्टहास विनाश का आभास काँपती रही लौ दिए की झील की लहरों पर देर तक आंधी के…See More
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(2122 1212 22)
"हार्दिक बधाई , आदरणीय.."
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )
"आ. भाई दिनेश जी , अच्छी गजल हुयी है हार्दिक बधाई ।"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- मैं अपने काम अगर वक़्त पर नहीं करता / दिनेश कुमार / इस्लाह हेतु.
"आ. भाई दिनेश जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
14 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service