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सुनो भैया !

कहीं मन नहीं लगता
जिधर देखती हूँ
तुम ही दिखाई देते हो
कभी आँगन में
माँ के साथ बैठे हुए, कभी
द्वार पर माँ के साथ
मन की बात करते हुए

मै जब भी आती थी
माँ के साथ-साथ तुम्हारे चेहरे पर भी
चमक आ जाती थी
माँ के आँचल की छाँव में
हम दोनों बचपन की यादें
याद कर खुश होते
और माँ भी युवा हो जाती थी   
दिन कैसे बीत जाते पता ही नहीं चलता

अब वही घर है वही आँगन
पर ना तुम हो ना माँ
आँगन उदास, द्वार उजाड़
ना माँ की ममता ना भाई का स्नेह
वीरान सा है ये मन
एक-एक पल काटे नहीं कटता
तुम्हारे बिना ये घर, घर नहीं लगता

जाने के बाद माँ के
हम रो भी ना पाए अंकवार दे
कह भी ना पाए ‘हम हैं ना’
न कर सके प्रतीक्षा मेरी
ख्याल बहन का दिल से निकाल  
चल दिए तुम माँ की उँगली थाम  

आज राखी है, बहने अपने मायके जायेंगी
भाई की कलाई को राखी से सजाएँगी
मायके में रह कर भी
मेरी राखी सूनी ही रह जायेगी
सोचा था   
इस बार अपने हाथों से
कलाई पर तुम्हारे राखी बांधूंगी
जीवन के झंझावातों से दूर
संग तुम्हारे कुछ दिन बिताऊँगी
पर विधि को नहीं था मंजूर

आज ढूँढती हूँ तुम्हें उसी आँगन में
द्वार पर, देख रही हूँ राह
शायद तुम लौट कर आओगे
जानती हूँ ये कोरा भ्रम है मेरा
तुम अब कभी लौट कर नहीं आओगे

मेरे भईया !
तुम्हारे बिन अब ना राखी है
ना राखी का त्योहार
हृदय में तुम्हारी छवि
और आँखों में आँसुओं का सैलाब ||

मौलिक/अप्रकाशित
मीना पाठक   
 
(माँ के लिए अभी-अभी लिखी एक रचना जिन्होंने इसी २० ता० को अपनी माँ और उसी के तीन दिन बाद आपने छोटे भाई को खो दिया)

 

 
 
 
  
 
 

  

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Comment

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Comment by Meena Pathak on September 14, 2015 at 8:03pm

जानती हूँ प्रतिभा जी ..बस् भाव ही हैं, शिल्प की तरफ़ उस दिन मेरा ध्यान ही नहीं गया, आप पोस्ट पर कई बार आयीं, बहुत अच्छा लगा ....बहुत बहुत आभार | सादर 

Comment by Meena Pathak on September 14, 2015 at 7:58pm

बहुत बहुत आभार प्रिय शशि जी 

Comment by pratibha pande on September 1, 2015 at 10:10am
मीना जी ,इस रचना पर पहले भी तीन चार बार आ चुकी हूँ ,पर कुछ कह पाने की हिम्मत जुटा नहीं पाई क्योंकि रचनाधर्मिता के ऊपर एक भावुक स्त्री मन है ,आप हौसला बनाये रखेंगी ,ये कामना करती हूँ
Comment by shashi bansal goyal on August 31, 2015 at 7:13pm
अत्यंत भावुक कर देने वाली प्रस्तुति । अंदर तक मन को भिगो गई । ईश्वर उन्हें इस मुश्किल घडी में हौसला रखने का साहस दे ।

कृपया ध्यान दे...

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