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इंतज़ार ....

ये बादे सबा
आज किसकी सदा लाई है
कुछ कम्पन्न है
कुछ नमी है
कुछ भीगी सी तन्हाई है
शायद ! अधूरे अहसासों ने
ज़हन में करवट ली है
लफ्ज़ लबों की हदों पर
तिश्नगी के अज़ाब में
डूबे नज़र आते हैं
इन साँसों की बेचैनियों में
जाने किस अजनबी का ख़ुलूस
करवटें लेता है
ये मेरी तदब्बुर में
किसके लम्स रक्स करते हैं
कोई तो नाख़ुदा होगा
जो मेरी हयात के सफ़ीने को
साहिल तक ले जाएगा
दबे पाँव आकर
मेरी खाकाए-हयात में
अपनी चराग़े-मुहब्बत जला जाएगा
अपनी पोरों की मस से
मेरे आरिजों पे गिरी
उलझी ज़ुल्फ़ों को सुलझा जाएगा
इक मुद्दत का इंतज़ार
इक पल में मिटा जाएगा

(ख़ुलूस =सच्चा प्यार /तदब्बुर =सोच/मस=स्पर्श/खाकाए -हयात=ज़िंदगी का चित्र )

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित



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Comment by Sushil Sarna on May 25, 2016 at 12:24pm

आदरणीय बशर भारतीय जी आपकी आत्मीय प्रशंसा का  दिल से आभार। 

Comment by बशर भारतीय on May 24, 2016 at 2:58pm
आदरणीय सुशील सरनाजी लाजवाब नज़्म है तहेदिल से बधाई आपको
Comment by Sushil Sarna on May 23, 2016 at 7:59pm

आदरणीया कांता रॉय जी प्रस्तुति की संवेदनाओं को महसूस कर आपने सृजन को जो मान दिया है उसके लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by kanta roy on May 23, 2016 at 4:47pm
मासूम सी संवेदनाओं को बहुत ही गहरे भाव दिये है आपने आदरणीय सुशील सरना जी , बधाई आपको ।
Comment by Sushil Sarna on May 20, 2016 at 2:42pm

आदरणीय Shyam Narain Verma साहिब प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Shyam Narain Verma on May 20, 2016 at 12:45pm
बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति , बधाई आप को | सादर 
Comment by Sushil Sarna on May 19, 2016 at 9:12pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan  साहिब प्रस्तुति पर आपकी  आत्मीय प्रशंसा का  दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 19, 2016 at 9:12pm

आदरणीय Samar kabeer   साहिब प्रस्तुति पर आपकी  आत्मीय प्रशंसा का  दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 19, 2016 at 9:11pm

आदरणीय  Pawan Kumar  साहिब प्रस्तुति पर आपकी  आत्मीय प्रशंसा का  दिल से आभार। 

Comment by narendrasinh chauhan on May 19, 2016 at 6:56pm

 शानदार प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें

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