For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गुंचा गुंचा गुलाब हो जाये

२१२२    १२१२    २२/112

गुंचा गुंचा गुलाब हो जाये 

सारा पानी शराब हो जाये 

उसके वालिद को देख इश्क मेरा 

हड्डी वाला कबाब हो जाये

क्या जरूरत है खोलने की लब 

जब नजर से जबाब हो जाये

मेरी नजरों के रुख पे पड़ते ही

हाथ उसका नकाब हो जाये

साथ उनके गुजारे जो लम्हे

लिख सकूँ तो किताब हो जाये

साक़िया बात कल की कल होगी

आज का तो हिसाब हो जाये

आज जीभर पिला मुझे साकी

आशु मुफलिस नवाब हो जाये  

.

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 893

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 17, 2016 at 4:29pm

आदरणीय रामबली जी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ सादर धन्यवाद के साथ

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 17, 2016 at 4:29pm

प्रिय जान भाई ..रचना को आपका स्नेह मिला इसके लिए ह्रदय से धन्यवाद स्वीकार करें सादर

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 17, 2016 at 4:28pm

आदरणीय श्याम जी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया से हौसला मिलता है ..सादर धन्यवाद के साथ

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 17, 2016 at 4:10pm

आदरणीय सुशील जी रचना पर आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभारी हूँ सादर धन्यवाद के साथ

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 17, 2016 at 4:09pm

आदरणीय समर कबीर सर .आप अपना बहुमूल्य समय हमें देते हैं और आपके मशविरे से हमारी दृष्टी को पैनापन मिलता है .आपके सुझाव के अनुरूप परिवर्तन कर रहा हूँ ..मतले के बारे में परामर्श देने का कष्ट करें ताकि इसे ठीक किया जा सका मैं आपके इशारे को पूरी तरह समझ नहीं पा रहा हूँ सादर प्रणाम के साथ

Comment by Shyam Narain Verma on May 17, 2016 at 3:50pm
इस खूबसूरत  रचना की हार्दिक बधाई
Comment by Sushil Sarna on May 17, 2016 at 3:46pm

आदरणीय आशुतोष जी बहुत ही सुंदर अशआर लिखे हैं आपने। इस सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई सर। 

Comment by रामबली गुप्ता on May 17, 2016 at 2:56pm
सभी शेर अच्छे हैं आदरणीय दिली दाद कुबूल फरमाएं
Comment by Samar kabeer on May 17, 2016 at 2:46pm
जनाब डॉ.आशुतोष मिश्रा जी आदाब,ग़ज़ल अभी कुछ और समय चाहती है ।
मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है ।
तीसरे शैर के ऊला मिसरे के आख़री शब्द'लव'को "लब"कर लें ।
पांचवे शैर का सानी मिसरा लय में नहीं है, सुझाव:-
"लिख सकूँ तो किताब हो जाये"
बाक़ी अशआर ठीक हैं,इस प्रस्तुति के लिये बधाई ।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 17, 2016 at 1:12pm
वाह्ह्ह् वाह्ह्ह्ह् आ. आशुतोष सर बेहतरीन ग़ज़ल शेर दर शेर दाद पेश है।इन दो शेर क लिए विशेष रूप से दाद कबूल फरमाएं।

साथ उनके गुजारे जो लम्हे
लिख दूं तो किताब हो जाये

साक़िया बात कल की कल होगी
आज का तो हिसाब हो जाये

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
14 hours ago
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
yesterday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service