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देश को आगे बढ़ाओ नौजवानों बढ़ चलो तुम |

२१२२       २१२२     २१२२         २१२२
देश को आगे बढ़ाओ  नौजवानों बढ़   चलो तुम   |
सो रहे जो आलसी बन साथ लेकर  चढ़ चलो तुम |
यों जवानी   ना गुजर   जाये नशे   में होश खोकर ,
ना समझ का सोच बदलो काम ऐसा गढ़ चलो तुम |
पास ना  आये बुढ़ापा     जोर  ऐसा    आजमाओ ,
काम से कोई डरे  ना चेहरा वो     पढ़ चलो तुम   |
दूर जाते हैं    नशे में छोड़     कर घर बार सारा ,
लत छुडादो नाश वाला लॉग  ऐसा मढ़ चलो तुम |
घर रहे या    नौकरी    में   देश सेवा हो हमेशा ,
माँ  कहीं भूखी मरे वर्मा कभी ना गढ़ चलो तुम  |
 
श्याम नारायण वर्मा 
मौलिक व अप्रकाशित |

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Comment by बशर भारतीय on May 26, 2016 at 7:19am
आदरणीय वर्माजी कोशिश अच्छी मगर थोड़ा समय और चाहिए इस ग़ज़ल को
Comment by Samar kabeer on May 25, 2016 at 10:38pm
जनाब श्याम नारायण वर्मा साहिब आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 25, 2016 at 8:57pm

अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीय | 

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 25, 2016 at 7:20pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, अच्छा प्रयास है आपका गजल पर. आपके लगभग हर शेर में 'ना' का प्रयोग हुआ है.जबकि शायर तो इस पर एतराज करते हैं. देख लें. 

यों जवानी   ना गुजर   जाये नशे   में होश खोकर ,

ना समझ का सोच बदलो काम ऐसा गढ़ चलो तुम |.............नासमझ का/की सोच बदलो //काम ऐसा गढ़ //चलो तुम. गढ़ना  अर्थात किसी वस्तु को तराशकर तैयार करना, काम को कैसे गढ़ा जाएगा ?देख लें. सादर.

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