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आईना बन के कभी सामने आया न करो - बैजनाथ शर्मा 'मिंटू'

212 2112 2112 222

प्यार में तुम मेरे ऐवों को दिखाया न करो|

आईना बन के कभी सामने आया न करो|

 

फ़ितनागर लोग ज़माने में बहुत देखें हैं,

हर किसी को कभी अब दोस्त बनाया न करो|

 

जाग उठाते हैं मेरे मन में सवालात कई,

हर किसी दर पे कभी सर को झुकाया न करो|

 जिनकी ताबीर न मुमकिन हो कभी जीवन में,

ऐसे सपने कभी आँखों में सजाया न करो|

 

एक दिन देखना छिड़केंगे नमक ज़ख्मों पर,

ज़ख्म अपने कभी अपनों को दिखाया न करो|

 

जान दे देंगे कभी ‘मिंटू’ तेरी यादों में,

ख़्वाब झूठे मुझे भूले से दिखाया न करो|

 

मौलिक व अप्रकाशित

बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’

Views: 746

Comment

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Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on June 2, 2016 at 7:02pm

आदरणीय गिरिराज साहेब ..................हौसला अफजाई के लिए शुक्रगुजार हूँ आपका 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 2, 2016 at 6:23pm

आदरणीय बैज नाथ भाई , अच्छी गज़ल कही है , दिल से बधाइयाँ आपको ।

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on June 2, 2016 at 5:17pm

आदरणीया कल्पना जी .........................बहुत बहुत शुक्रिया आपका 

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on June 2, 2016 at 5:16pm

आदरणीया कांता जी ......................ममनून हूँ आपका 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on June 2, 2016 at 3:36pm

बहुत सुंदर रचना | बधाई आदरणीय बैजनाथ जी |

Comment by kanta roy on June 2, 2016 at 11:22am
एक दिन देखना छिड़केंगे नमक ज़ख्मों पर,
ज़ख्म अपने कभी अपनों को दिखाया न करो|.... वाह ! बहुत गहरी बात कही है आपने आदरणीय बैजनाथ जी । बधाई स्वीकार करें ।
Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on June 1, 2016 at 5:38pm

आदरणीय समर साहेब ...............हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on June 1, 2016 at 5:37pm

आदरणीय श्याम वर्मा साहेब ................ममनून हूँ आपका 

Comment by Samar kabeer on June 1, 2016 at 12:38pm
जनाब बैजनाथ शर्मा'मिंटू'जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।
Comment by Shyam Narain Verma on May 31, 2016 at 5:30pm
बहुत ही सुन्दर ,  हार्दिक बधाई आपको …………..

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