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हमारी दिल्ली में- बैजनाथ शर्मा 'मिंटू'

अरकान - 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2

 

पैसों का व्यापार हमारी दिल्ली में|   

गुंडों की सरकार हमारी दिल्ली में|

 

साँप–सपोले जब से संसद जा पहुंचे ,

ज़हरों का व्यापार हमारी दिल्ली में|

 

लूट रहे है अस्मत मिलकर सब देखो,

हैं भारत माँ लाचार हमारी दिल्ली में|

 

जाति-धरम के नाम पे मिलती नौकरियाँ

हम जैसे बेकार हमारी दिल्ली में |

 

लालकिला, जंतर-मंतर सब रोते हैं,

अब गुल ना गुलज़ार हमारी दिल्ली में|

 

गुंडागर्दी सड़क से लेकर संसद तक,

गुंडों का भण्डार हमारी दिल्ली में |

 

खूँ से लथपथ दिखते हैं अखबार सभी,

कितना अत्याचार हमारी दिल्ली में |

 

 

हैं चोर-चोर मौसेरे भाई सब नेता,

एक से एक मक्कार हमारी दिल्ली में|  

 

मौलिक व अप्रकाशित 

बैजनाथ शर्मा 'मिंटू' 

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Comment

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Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on May 26, 2016 at 4:46pm

आदरणीय बशर भारतीय साहेब ...........हौसला अफजाई के लिए ....बहुत - बहुत शुक्रिया आपका 

Comment by बशर भारतीय on May 26, 2016 at 7:32am
आ. शर्माजी अच्छी ग़ज़ल है बधाई आपको
Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on May 26, 2016 at 12:09am

आदरणीय सुरेश साहेब

आदरणीय रवि साहेब

आदरणीय समर साहेब 

आदरणीया कल्पना साहिबा ..............................ममनून हूँ आप सब का|

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 25, 2016 at 9:08pm

कटु सत्य | आदरणीय मिंटू जी | हार्दिक बधाई | 

Comment by Samar kabeer on May 25, 2016 at 2:39pm
जनाब मिंटू जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Ravi Shukla on May 25, 2016 at 12:50pm

आदरणीय बैज नाथ जी बधाई स्‍वीकार करे इस तीखे व्‍यंग के लिये आखिरी शेर का सानी मिसरा पुन: देख ले शायद एक फा जियादा है

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on May 25, 2016 at 8:02am
आदरणीय बैजनाथ शर्मा मिंटू जी आज के बिगडते समाज का बहुत ही अच्छा चित्र प्रस्तुत किया है बधाई स्वीकार करें

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