For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हमारी दिल्ली में- बैजनाथ शर्मा 'मिंटू'

अरकान - 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2 2

 

पैसों का व्यापार हमारी दिल्ली में|   

गुंडों की सरकार हमारी दिल्ली में|

 

साँप–सपोले जब से संसद जा पहुंचे ,

ज़हरों का व्यापार हमारी दिल्ली में|

 

लूट रहे है अस्मत मिलकर सब देखो,

हैं भारत माँ लाचार हमारी दिल्ली में|

 

जाति-धरम के नाम पे मिलती नौकरियाँ

हम जैसे बेकार हमारी दिल्ली में |

 

लालकिला, जंतर-मंतर सब रोते हैं,

अब गुल ना गुलज़ार हमारी दिल्ली में|

 

गुंडागर्दी सड़क से लेकर संसद तक,

गुंडों का भण्डार हमारी दिल्ली में |

 

खूँ से लथपथ दिखते हैं अखबार सभी,

कितना अत्याचार हमारी दिल्ली में |

 

 

हैं चोर-चोर मौसेरे भाई सब नेता,

एक से एक मक्कार हमारी दिल्ली में|  

 

मौलिक व अप्रकाशित 

बैजनाथ शर्मा 'मिंटू' 

Views: 370

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by BAIJNATH SHARMA'MINTU' on May 26, 2016 at 4:46pm

आदरणीय बशर भारतीय साहेब ...........हौसला अफजाई के लिए ....बहुत - बहुत शुक्रिया आपका 

Comment by बशर भारतीय on May 26, 2016 at 7:32am
आ. शर्माजी अच्छी ग़ज़ल है बधाई आपको
Comment by BAIJNATH SHARMA'MINTU' on May 26, 2016 at 12:09am

आदरणीय सुरेश साहेब

आदरणीय रवि साहेब

आदरणीय समर साहेब 

आदरणीया कल्पना साहिबा ..............................ममनून हूँ आप सब का|

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 25, 2016 at 9:08pm

कटु सत्य | आदरणीय मिंटू जी | हार्दिक बधाई | 

Comment by Samar kabeer on May 25, 2016 at 2:39pm
जनाब मिंटू जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Ravi Shukla on May 25, 2016 at 12:50pm

आदरणीय बैज नाथ जी बधाई स्‍वीकार करे इस तीखे व्‍यंग के लिये आखिरी शेर का सानी मिसरा पुन: देख ले शायद एक फा जियादा है

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on May 25, 2016 at 8:02am
आदरणीय बैजनाथ शर्मा मिंटू जी आज के बिगडते समाज का बहुत ही अच्छा चित्र प्रस्तुत किया है बधाई स्वीकार करें

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

gumnaam pithoragarhi posted a blog post

गजल

212  212  212  22 इक वहम सी लगे वो भरी सी जेब साथ रहती मेरे अब फटी सी जेब ख्वाब देखे सदा सुनहरे दिन…See More
1 hour ago
gumnaam pithoragarhi commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"वाह शानदार गजल हुई है वाह .. "
1 hour ago
Usha Awasthi posted a blog post

सब एक

सब एक उषा अवस्थी सत्य में स्थित कौन किसे हाराएगा? कौन किससे हारेगा? जो तुम, वह हम सब एक ज्ञानी वही…See More
16 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"शंका निवारण करने के लिए धन्यवाद आदरणीय धामी भाई जी।"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, निम्न पंक्तियों को गूगल करें शंका समाधान हो जायेगा।//अपने सीपी-से अन्तर में…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। अच्छी समसामयिक गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post गज़ल
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई इन्द्रविद्यावाचस्पति जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
yesterday
indravidyavachaspatitiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जमाने को अच्छा अगर कर न पाये, ग़ज़ल के लिए धन्यवाद।करता कहना।काश सभी ऐसा सोचते?"
yesterday
AMAN SINHA posted a blog post

किराए का मकान

दीवारें हैं छत हैंसंगमरमर का फर्श भीफिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगताचुकाता हूँमैं इसका दाम, हर…See More
Saturday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service