For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2122 2122 2122 2
झाँक कर देखा दिलों में, सो रहे हैं सब।
एक जर्जर आत्मा ही ढ़ो, रहे हैं सब।।

कोठियों में लोग खुश हैं, भ्रम में ही था मैं।
किन्तु धन के वास्ते ही, रो रहे हैं सब।।

शीर्ष पर जो लोग लगता, पा गये सब कुछ।
जाके देखा पाया खुद को, खो रहे हैं सब।।

लग रहा था लोग मन्ज़िल, के सफर पर हैं।
हूँ चकित की दूर खुद से, हो रहे हैं सब।।

बंग्ले गाड़ी सुख के साधन, था गलत ये "मत"
आँधियाँ कह कर गयीं, दुख बो रहे हैं सब।।

मौलिक-अप्रकाशित

Views: 884

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 30, 2016 at 8:38am
आदरनीय सुशील सरन सर सादर धन्यवाद
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 15, 2016 at 7:07pm
प्रिय जयनीत भाई सादर धन्यवाद
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 15, 2016 at 7:07pm
आदरणीय रवि सर सादर प्रणाम, बहुत दिनों बाद आशीर्वाद मिला, सादर आभार।
Comment by जयनित कुमार मेहता on June 9, 2016 at 10:34pm
आदरणीय पंकज मिश्र जी, अच्छी ग़ज़ल कही आपने।
हार्दिक बधाई!
Comment by Ravi Shukla on June 9, 2016 at 5:18pm

आदरणीय पंकज जी बधाई स्‍वीकार करें इस गजल के लिये 

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 9, 2016 at 2:08pm
आदरणीय सूर्य बली जी सादर आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 9, 2016 at 2:08pm
आदरणीय राजेश दीदी सादर प्रणाम।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 9, 2016 at 2:07pm
आदरणीय श्याम नारायण सर सादर आभार।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 9, 2016 at 2:07pm
आदरणीय शेख शहज़ाद सर सादर प्रणाम। ग़ज़ल को आशीर्वाद प्रदान करने के लिए सादर आभार
Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 9, 2016 at 12:33pm

अच्छी रचना । बधाइयाँ 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
2 hours ago
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
5 hours ago
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service