For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तपन है आग है शोले हैं चिंगारी है सीने में

तपन है आग है शोले हैं चिंगारी है सीने में
अजब सी बेक़रारी है बिछड़ कर तुमसे, जीने में

मेरे दिल की हर इक धड़कन यही फ़रियाद करती है
बुला लीजै मेरे आका मुझे भी अब मदीने में

ज़रूरी है नहीं की हर सफ़र अंजाम तक पहुंचे
गुहर मिलते नहीं सबको मुहब्बत के दफ़ीने में

गरजते बादलों के ख़ौफ़ से उसका लिपट जाना
बहुत ही याद आता है वो बारिश के महीने में

कोई इक दोस्त आ जाए कोई दुश्मन ही आ जाए
मज़ा आता नहीं "सूरज" अकेले जाम पीने में

डॉ सूर्या बाली 'सूरज"
भोपाल
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 1030

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by anupam choubey on August 26, 2016 at 1:35pm

बहुत ही लाजबाब जनाब

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 18, 2016 at 10:43pm

अच्छे अश’आर हुए हैं आदरणीय सूर्या जी, दाद कुबूल कीजिए


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 22, 2016 at 4:00am

इस ग़ज़ल का मतला बेहद खूबसूरत है, आदरणीय सूर्याबाली जी. दाद कुबूल कीजिये.

ज़रूरी है नहीं की हर सफ़र अंजाम तक पहुंचे .. इस मिसरे में आया की वस्तुतः कि होगा न ? यदि ऐसा है तो इस मिसरे को फिर से देखना होगा, आदरणीय. या उर्दू की भाषा के अनुसर यह सही है ? जैसे, हिन्दी का खुश्बुएँ, उर्दू में खुश्बूएँ हो सकता है.

सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 21, 2016 at 9:41pm

क्या बात है क्या बात है बहुत ही खूबसूरत 

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 20, 2016 at 10:21pm
गिरिराज जी सौरभ जी महर्षि जी और आशुतोष जी आप सभी का हृदय से आभार
गिरिराज जी रचनाएँ पढ़ी जाए ये ज़रूरी नहीं हैं
प्रतिक्रिया ना आने का मतलब ये नहीं की रचनाएँ पढ़ी नहीं जा रहीं. हर रचना अपना पाठक ढूँढ लेती है
रचना योग्य होगी तो उस पर लोगों का ध्यान ज़रूर जाएगा
और ते भी ज़रूरी नहीं की सभी रचनाएँ इस योग्य हो
Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 15, 2016 at 2:18pm

आदरणीय बाली जी ..आपकी रचना का लुत्फ़ उठाया  इस सुंदर रचना के लिए तहे दिल बधाई स्वीकार करें सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 15, 2016 at 2:08pm

अभी एक मीटिङ में हूँ।

लेकिन इस संदर्भ में एक बात कहनी बहुत ज़रूरी है।  पाठकीयता की अपेक्षा व्यक्ति या किसी समूह से न कर, यह सभी सदस्यों से अपेक्षित है । 

विधा विशेष के प्रति आग्रह यदि हमें एक पाठक के तौर पर संकुचित कर रहा है तो यह स्थिति किसी रचनाकार के लिए शोचनीय है। 

सादर

Comment by maharshi tripathi on June 15, 2016 at 1:22pm
आ.गिरिराज भंडारी सर जी,सिर्फ यही नही,ऐसा बहुत सी रचनाओ के साथ होता है,कुछ गिनी चुनी और स्पेशल रचनओं पर कई गुणीजन प्रतिक्रिया देते हैं,मेरे साथ भी ऐसा हुआ है,अगर ऐसा रहा तो हम सीख नही payeng !!!!!
Comment by maharshi tripathi on June 15, 2016 at 1:15pm
गेयता और भाव दोनो का समावेश है,शब्द चयन भी बढिया है,बहुत बहुत बधाई आ सूरज जी !!!!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 15, 2016 at 10:03am

ये बड़ा दुख का विषय यह रचना अब तक किसी के द्वारा पड़ी नही गई , क्या ये सोचनीय स्थिति नही है ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
19 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय चेतन प्रकाश जी "
20 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
22 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.लक्ष्मण सिंह मुसाफिर साहब,  अच्छी ग़ज़ल हुई, और बेहतर निखार सकते आप । लेकिन  आ.श्री…"
23 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ.मिथिलेश वामनकर साहब,  अतिशय आभार आपका, प्रोत्साहन हेतु !"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"देर आयद दुरुस्त आयद,  आ.नीलेश नूर साहब,  मुशायर की रौनक  लौट आयी। बहुत अच्छी ग़ज़ल…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
" ,आ, नीलेशजी कुल मिलाकर बहुत बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई,  जनाब!"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन।  गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार। भाई तिलकराज जी द्वार…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए आभार।…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"तितलियों पर अपने खूब पकड़ा है। इस पर मेरा ध्यान नहीं गया। "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion र"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-185
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी नमस्कार बहुत- बहुत शुक्रिया आपका आपने वक़्त निकाला विशेष बधाई के लिए भी…"
yesterday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service