For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

माँ - जब हम पैदा भईनी
हम त कुछ न जानत रहनी
कि डायबिटीज भी कुछ होखेला
आ एकरा से जीवन में कुछ फरक परेला
हम त ईहे जानत रहनी कि
अइसही होखत होई - खूब भूख लगत होई -
अइसहीं होखत होई - कबो खूब घुमरी आवत होई
हाथ - पैर झनझनात होई - चश्मा लगवले पर ठीक लऊकत होई I

हमरा खातिर त ई दुनिया
तबो अइसने रहे - सामान्य
हमरा खातिर ई दुनिया
आजो अइसने बा - सामान्य
बाकिर हमार - ना - तहार दुनिया बदल गईल
तब तूं खूब रोवलू
जब तहरा के बतावल गईल -
लईका के "डायबिटीज" बा I

हम त कुछ न जानत रहनी
कि डायबिटीज भी कुछ होखेला
बाकिर जब दुनिया के
थोर बहुत समझ आवे लागल -
तब तहार चेहरा के भाव देख के
बुझाईल कुछ गड़बड़ बा
बाकिर का गड़बड़ बा
समझ में न आईल I

तब तूं हमार खान-पान
अनुशासित करे लगलू
- हम मिठाई मांगी - तूं कह ना
दूध में चीनी मांगी - तूं कह ना
हम तहरा से भात दाल मांगी -
तूं हमरा के रोटी दाल खियाव -
हम आलू के भुजिया खाए के चाहीं -
तूं हमरा के करेला खियावे के कोशिश कर I

दुनिया भर के टेस्ट - विशेषज्ञ के "consultancy"
बतावल गईल - लईका के बीमारी जन्मजात बा
"जेनेटिक fडस्पोfजसन" - कवनो सटीक इलाज नईखे
एह उम्र में - बस इंसुलिन ही इलाज बा -
शुरू में हम बहुत रोई - हम देखीं कि तोहूँ रोव
बाकिर अब आदत पर गईल बा
तूं रोवबू एहिसे अब ना कहिले - कि बहुत दुखाला -
बाकिर अब अपने से ले लिहिले - इंसुलिन के इंजेक्शन

माँ - ब्रहम बाबा कुछ ना करिहे -
गाँव के किनार के मठिया वाला बाबा भी
कुछ नईखन कर सकत - ना त सोखा बाबा
ना गाँव के सती माई - तहार महाबीर जी भी ना
समझ ल - हमार ईहे नियति बा -
दुनिया भर के दवाई - इंसुलिन के इंजेक्शन
दुनिया में जीवन अइसने होला हम त ईहे जानीले
अब त तूहूँ जान ल, अपना मन के मना ल I

Views: 590

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by aleem azmi on July 6, 2010 at 12:41pm
bahut sunder kavita aapki ....mubarak ho
Comment by BIJAY PATHAK on June 23, 2010 at 1:02pm
Bahut Badhiya
Comment by Sanjay Kumar Singh on June 22, 2010 at 2:57pm
माँ - ब्रहम बाबा कुछ ना करिहे -
गाँव के किनार के मठिया वाला बाबा भी
कुछ नईखन कर सकत - ना त सोखा बाबा
ना गाँव के सती माई - तहार महाबीर जी भी ना
समझ ल - हमार ईहे नियति बा -
Bahut hi sunder rachna aur bahut hi sunder prastuti hai,
Comment by satish mapatpuri on June 21, 2010 at 4:05pm
तब तूं हमार खान-पान
अनुशासित करे लगलू
- हम मिठाई मांगी - तूं कह ना
दूध में चीनी मांगी - तूं कह ना
हम तहरा से भात दाल मांगी -
तूं हमरा के रोटी दाल खियाव -
हम आलू के भुजिया खाए के चाहीं -
तूं हमरा के करेला खियावे के कोशिश कर I
नीलम जी. OBO पर आपका ब्लॉग देख कर बड़ा सुखद लगा. बड़ा अपनापन है इस रचना में, धन्यवाद.
Comment by Neelam Upadhyaya on June 21, 2010 at 12:36pm
Ji bahut bahut dhanyawaad. Hum age se raura sujhaw par amal kare ke koshish karab.
Comment by Admin on June 21, 2010 at 12:14pm
तब तूं हमार खान-पान
अनुशासित करे लगलू
- हम मिठाई मांगी - तूं कह ना
दूध में चीनी मांगी - तूं कह ना
हम तहरा से भात दाल मांगी -
तूं हमरा के रोटी दाल खियाव -
हम आलू के भुजिया खाए के चाहीं -
तूं हमरा के करेला खियावे के कोशिश कर इ

नीलम बहिन प्रणाम , सबसे पहिले त हम ओपन बुक्स ऑनलाइन पर राउर पहिला ब्लॉग के दिल से स्वागत करत बानी, बहुत ही नीमन रौवा कविता लिखले बानी, बेटा भा बेटी के अगर कवनो दुःख तकलीफ होला त महतारी बाप के केतना तकलीफ होला इ राउर कविता मे साफ़ झलकत बा, हम त महसूस भी कईले बानी कि जब कबो हमार तबियत ख़राब होखे त हमरा साथे साथे हमार माई आ पिता जी भी रात रात भर जागस आ हमसे छुपा के रो लेस , कि कही बबुवा रोअत देख लिही त वोकरा औरी तकलीफ होई,
बहुत सुंदर राउर अभिव्यक्ति बा, एह कविता खातिर बहुत बहुत आभार बा, साथ ही एगो नम्र निहोरा बा कि भोजपुरी के रचना पोस्ट करे खातिर ओपन बुक्स ऑनलाइन पर एगो अलग से "भोजपुरी साहित्य" नाम के ग्रुप बनावल बा , कृपा कर के भोजपुरी रचना वोइजा ही पोस्ट करी जेसे भोजपुरी साहित्य एक जगह ही पढ़े के मिल जाव , सुविधा खातिर हम लिंक नीचे दे देत बानी,

http://www.openbooksonline.com/group/bhojpuri_sahitya

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service