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तरह ग़ज़ल -याद रख अगर कच्चा रास्ता नहीं होता

तरह ग़ज़ल
याद रख,अगर कच्चा रास्ता नहीं होता
आज तू सड़क पर यूँ दौड़ता नहीं होता ।
आदमी करेगा बेशर्म हरक़तें अक्सर,
ना समझ नहीं है,के जानता नहीं होता!!
तेज गति समय पहले मौत को बुलाती है
आप धीरे चलते तो हादसा नहीं होता
प्यार के मरासिम ऐसे निभाये जाते हैं
फूल को देखना तो है तोड़ना नहीं होता
क्यों ख़फा है दुनिया से,फैसला बदल अपना
इस जहाँ में हर कोई बेवफ़ा नहीं होता वो तो खूबसूरत है,हर नज़र उसी पर है
ग़म न कीजिए,वो गर आपका नहीं होता।
वो हजारों मीलों से प्यार देख लेते हैं
इश्क करने वालों में फासला नहीं होता
झूठ के सहारे हम तो "सुजान "जीते हैं
जिंदगी की सच्चाई का पता नहीं होता ।

मौलिक व अप्रकाशित।
सूबे सिंह "सुजान"

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 13, 2016 at 5:18pm
बहुत सुंदर आदरणीय सूबे सिंह सुजान सर अच्छी ग़थ़ल हुई है। सादर बधाई आपको
Comment by Shyam Narain Verma on July 13, 2016 at 3:59pm
बहुत सुन्दर ... सादर बधाई स्वीकारें आदरणीय

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