For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सावन गीत (उल्लाला छंद)/सतविन्द्र कुमार

क्यों अब तक सोये पड़े, सुनों पवन संगीत जी
झम झम झम बूँदें गिरें,गर्मी बनती शीत जी।

उमस बढ़ी जब जोर से,जिस्म पसीना सालता
दम घुट-घुट कर आ रहा,मुश्किल में ये डालता
राहत औ ठंडक मिले,सो बरखा से प्रीत जी
झम झम झम बूँदें गिरें,गर्मी बनती शीत जी।

धान-कटोरा सूखता,बिन पानी के मेल से
कृषक सभी उकता गए,लुक-छिप के इस खेल से
बादल अब जाओ बरस,करो नहीं भयभीत जी
झम झम झम बूँदें गिरें,गर्मी बनती शीत जी।

सावन भी यह टीसता, बिन बरखा के साथ के
अब तक झूल पड़ी नहीं,बिन प्रीतम के हाथ के
बरसे सावन झूम के,गाएं मंगल गीत जी
झम-झम-झम बूँदें गिरें,गर्मी बनती शीत जी।

आया सावन झूम के,बरसे बादल जोर से
शीतलता अब छा रही,मनवा नाचें मोर-से
खुशियों में उत्सव मनें,यही जगत की रीत जी
झम-झम-झम बूँदें गिरें,गर्मी बनती शीत जी।।

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Views: 880

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 17, 2016 at 3:38pm
आभार आदरणीया कल्पना दीदी।सादर न्Mन्
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 17, 2016 at 9:59am
बहुत सुन्दर रचना । हार्दिक बधाई आदरणीय।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 12, 2016 at 9:15pm
आदरणीय केवल प्रसाद् जी, उल्लाला छ्न्द पर शायद यह प्रथम या द्वितीय प्रयास ही था।इसे समीक्षार्थ ही पोस्ट किया था।पर टिप्पणी या समीक्षा से यह अबतक महरूम ही रहा।आपकी इस पर दृष्टि पड़ी,तो यह प्रयास सार्थक हुआ।अनुमोदन,प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन के लिए आभार।आपके सुझाव के अनुसार समय देने का भरपूर प्रयत्न करूँगा।सादर नमन
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 11, 2016 at 5:24pm

बड़ा आश्चर्य है. . ? 230 में एक भी टिप्पणी नही. . ?

आ0 सतविंद्र भाई जी,   इस गीत में भाव समृद्ध हैं।  हाँ !  अभी इस गीत को और समय देने की जरूरत है।   लगता है आपने इसे बहुत जल्दी में पोस्ट कर दिया है।  सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
12 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
12 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
13 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
14 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
23 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service