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मेरी जान

बनकर दुल्हन

बनी ठनी 

सजी संवरी

मृदु मुस्कान

भर चली ।

मेरी लाडो

बन दुल्हन

घर चली | 

वीरान आँगन

वो मेरा

कर चली ।

मेरी जान

अपने सजन की 

हो चली ।

घर बाबुल का 

पीछे छोड़ 

चल पड़ी | 

नए सपने सजोये

अपने पी के संग 

हो चली | 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 465

Comment

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 20, 2016 at 8:18pm
आदाब जनाब समर साहब । तहे दिल से शुक्रिया आपका ।
Comment by Samar kabeer on July 20, 2016 at 6:51pm
मोहतरमा कल्पना भट्ट साहिबा आदाब,सबसे पहले तो बिटिया की शादी की दिल से बधाई स्वीकार करें ।
दिल को जज़्बाती कर गई आपकी ये रचना,बहुत ही सलीके से अपने भाव पिरोये हैं आपने,बेटी की जुदाई,उसके ब्याह की प्रसन्नता सब कुछ समा गया इस प्रस्तुति में,दिल से ढेरों बधाई स्वीकार करें ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 19, 2016 at 8:46pm
धन्यवाद अदरणीय शुशील सर
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 19, 2016 at 8:45pm
धन्यवाद अदरणीय गिरिराज सर ।
Comment by Sushil Sarna on July 19, 2016 at 7:21pm

मेरी जान
अपने सजन की
हो चली ।
घर बाबुल का
पीछे छोड़
चल पड़ी |
नए सपने सजोये
अपने पी के संग
हो चली |

अति अति अति उत्तम प्रस्तुति ... इस भावों की गागर छलकाती रचना के लिए हार्दिक हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 19, 2016 at 6:30pm

आदरणीया कल्पना जी , सुन्दर भाव पूर्ण प्रस्तुति के लिये आपकओ हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 19, 2016 at 8:38am
सादर धन्यवाद सर
Comment by Ashok Kumar Raktale on July 19, 2016 at 7:29am

मेरी लाडो

बन दुल्हन

घर चली | 

वीरान आँगन

वो मेरा

कर चली ।....वाह !

आदरणीया कल्पना भट्ट जी सादर, इस सुंदर हृदयस्पर्शी प्रस्तुति के लिए , बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर.

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