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ग़ज़ल- कोई खुश है, आओ ताली हम भीं दे दें ( गिरिराज भंडारी )

22   22   22   22   22   22 - बहरे मीर

अर्थ निकालें, उनको लाली हम भी दे दें

जो भी मर्ज़ी आये गाली हम भी दे दें

 

किसी शहर में हुआ सुना है आज धमाका

कोई खुश है, आओ ताली हम भीं दे दें

 

दूर बहुत, आये हैं अपने आकाओं से ,

थोड़ी सी उनको रखवाली हम भी दे दें

 

थाली के बैंगन वैसे तो साथ लगे. पर  

कोई कारण, कोई थाली हम भी दे दें

 

वैसे तो तैनाती दिखती सभी बाग़ में

फर्दा की खातिर कुछ माली हम भी दे दें

 

देखें तो आकाश हमें क्या दे पाता है

क्यूँ ना उसको रोज़ सवाली हम भी दे दें

 

हम जब आये सूना था घर का हर कोना

क्या जवाब में घर को खाली हम भी दे दें ?

 

वो कहते हैं, झंझट  ऐसे मिट जायेगी ,
अपने सर को टोपी जाली , हम भी दे दें

************************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 11, 2016 at 10:38am

आदरनीय रवि भाई , सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 11, 2016 at 10:38am

आदरणीय राज किशोर भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 11, 2016 at 10:37am

आदरणीय बृजेश भाई , सराहना के लिये आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 11, 2016 at 10:36am

आदरणीय सुशील सरना भाई , हौसला अफज़ाई का बहुत शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 11, 2016 at 10:36am

आदरणीय श्याम नाराइन भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका आभार ।

Comment by Ravi Shukla on August 8, 2016 at 11:28am

आदरणीय गिरिराज भाई जी बहुत बहुत बधाई इस सुन्‍दर गजल के लिये 

Comment by राजकिशोर मिश्र 'राज' प्रतापगढ़ी on August 7, 2016 at 3:56pm

वाह अतिसुन्दर 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 6, 2016 at 9:47pm

वाह आदरणीय वाह अतिसुन्दर 

Comment by Sushil Sarna on August 6, 2016 at 8:04pm

अर्थ निकालें, उनको लाली हम भी दे दें
जो भी मर्ज़ी आये गाली हम भी दे दें

किसी शहर में हुआ सुना है आज धमाका
कोई खुश है, आओ ताली हम भीं दे दें

बहुत खूब आदरणीय गिरिराज भाई साहिब ... क्या अशआर हैं आपकी इस खूबसूरत ग़ज़ल के .... दिल खुश हो गया। .. दिल से दाद कबूल फऱमाएं सर।

Comment by Shyam Narain Verma on August 6, 2016 at 3:15pm
 इस सुंदर ग़ज़लक़े लिए हार्दिक बधाई सादर ,

कृपया ध्यान दे...

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