For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उलझे हुए लोग/ लघुकथा

आज भी चबूतरे पर बैठने कोई नहीं आया। चबूतरा उदास था। साल में सिर्फ दो बार ही यहाँ सांस्कृतिक आयोजन हुआ करता था बाकि दिनों में सुबह-शाम मोहल्ले के बुजूर्गों का जमावड़ा और उनके ठहाकों का शोर रहता था। हालांकि उनके ठहाकों का मुख्य श्रोत युवाओं के प्रति कटाक्ष ही हुआ करता था।
कौन युवा ? अरे , वही जिन्होंने एकता और सौहार्द्रता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दूर्गा पूजा समीति बना कर इस चबूतरे का निर्माण करवाया था।
जिनके कारण कॉलोनी को गंगा- जमुनी तहजीब के कारण शहर में सम्मान मिला करता है।
बच्चों ने तो समरसता को आत्मसात कर लिया लेकिन ये बड़े लोग ,ऊफ्फ !

परसों की ही बात है ,रोज की तरह लगे हुए थे ये लोग बतकुचन में । युवाओं को शऊर नहीं , धर्म जाति सब लीलने पर लगे है । बहन , बेटियों के बराबर दर्जा देने वाली बातें थोथलेबाजी के अलावा कुछ नहीं है वगैरह वगैरह । आजू बाजू से बेखबर लगे हुए थे सब मिल कर और बीच -बीच में खींसे निपोर... होss...होss.... की ध्वनि एक साथ निकालते ।

तभी रधुवीर के छोरे ने सुन लिया और खबर कर दिया जाकर सबको।

दूसरे दिन जैसे ही इनकी ठहाकों की गुंज से चबूतरे का सन्नाटा टूटा कि सबके सब हाजिर । नया जोश , कहाँ थमने वाले , वे लोग ताक लगा कर बैठे ही थे। युवाओं नें उन सबको चबूतरे के चारों ओर से घेर लिया और पूजा समीति की समस्त सांस्कृतिक जिम्मेदारी उठा लेने का प्रस्ताव रख दिया उनके सामने।

जिम्मेदारी लेने की बात शुरू होते ही सबको मानो साँप सूँघ गया। एक दूसरे का मुँह ताकने लगे। जरा ही देर में वे सभी आहिस्ता- आहिस्ता वहाँ से निकलते बने।
उनको जाते हुए देख कर एक ने कहा, अंकल ,हम सब आपके लिये यहाँ इंतजार करेंगे,जल्दी आकर आप लोग अपना चार्ज सम्भाल लीजियेगा ।
उस दिन को आज तीन दिन हो गये युवाओं के साथ चबूतरा भी उनका इंतजार कर रहा है।

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 495

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अलका 'कृष्णांशी' on September 9, 2016 at 9:12pm

कटाक्ष  करती इस लघुकथा की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया कांता जी 

Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:14pm
आपको लघुकथा प्रभावित करने में सफल रहा ,यह तो मेरे लिये अवार्ड मिलने जैसा महसूस हो रहा है।आपसे सराहना पाना सुखद है। आभारी हूूँ दिल से।
Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:12pm
तंज के इस तीर का मर्म समझने के लिये हृदय से आभार आपका आदरणीय समर कबीर जी।
Comment by kanta roy on September 4, 2016 at 2:11pm
उलझे हुए लोगों की उलझनों के तह तक पहुँच कर लघुकथा को पसंद करने के लिये हृदय से आभार आपका आदरणीय सुशील सरना जी।
Comment by pratibha pande on September 1, 2016 at 7:33pm

//जिम्मेदारी लेने की बात शुरू होते ही सबको मानो साँप सूँघ गया। एक दूसरे का मुँह ताकने लगे। जरा ही देर में वे सभी आहिस्ता- आहिस्ता वहाँ से निकलते बने//      ये   कुछ करेंगे भी नहीं और जो भी नया है उसकी आलोचना भी करेंगे ... तथाकथित वरिष्ठों की मानसिकता का सटीक चिट्ठा खोला आपने ... कथा की शैली प्रभावशाली है ...आपको हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीया कांता जी 

Comment by Samar kabeer on August 31, 2016 at 6:07pm
मोहतरमा कांता रॉय जी आदाब,बहुत उम्दा जज़्बे को लेकर बहतरीन तंज़ के तीर चलती इस लघुकथा के लिये दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sushil Sarna on August 31, 2016 at 2:08pm

आदरणीया कांता जी यथार्थ को उजागर करती और तीक्ष्ण कटाक्ष से परिस्थितिजन्य भाव को चित्रित करती इस लघुकथा की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin posted discussions
14 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
15 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
Monday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
Monday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service