For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"अपमान "

'जल्दी से आ जा मोनू ,खाना गरम है,खा लें,सबके साथ ।
क्या जल्दी है ,माँ खाना खाना लगा रखा है ?
आते साथ चुपचाप बैठा देख माँ से रहा ना गया।
हाथ धोकर आजा बेटा, फिर खाना खाने बैठ।
जितना तुझे ज़रूरत हो उतना ही लेना,छोड़ना मत ।माँ ने लाड़ले को समझाना चाहा ।
'अब पेट कोई कमरा नही है खाता जाऊँगा ,थोड़ा छूट गया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ?
ये अन्नदेव का अपमान है बेटा ।
वो कैसे ?जिस दिन तुम्है ग़ुस्सा आ जाता है,और उस दिन तुम खाना नही खाते तब ये संतुलन और हिसाब बराबर हो जाता है ।
और दादा जी जो जरा सी देर होने पर थाली फेंक देते है तब ?
तुम एेसा नही कर सकते क्योंकि बडे गल्ती करते है तो हमें उनकी ग़लती से सबक़ सीखना चाहिये ।
तनिक भी देर ना लगायी बेटे ने ,माँ के चरण छू लिये ।
'माँ सचमुच भगवान होती है।'

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 247

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by babitagupta on May 5, 2018 at 5:48pm

बच्चो सही सीख देती अति सुंदर प्रस्तुति,बधाई हो.

Comment by TEJ VEER SINGH on September 13, 2016 at 1:22pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नीता जी।शनदार और संदेशपरक लघुकथा।

Comment by Sushil Sarna on September 13, 2016 at 12:36pm

आदरणीया नीता जी सुंदर और संदेशात्मक लघुकथा की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई  स्वीकार करें। 

Comment by Samar kabeer on September 13, 2016 at 11:46am
मोहतरमा नीता कसार जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,लेकिन कसी हुई नहीं है,बधाई स्वीकार हो इस प्रस्तुति पर ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

DR ARUN KUMAR SHASTRI posted a blog post

दिल्लगी

जिस इश्क में दिल्लगी नही होती उस इश्क की तो जानू  उमर भी नही होतीसिलसिला साँसों का जिस रोज़ थम…See More
1 hour ago
Harash Mahajan commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी आदाब । अच्छी पेशकश हेतु बधाई स्वीकार करें । सादर ।"
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र-22/22/22/22/22/2अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ और किसी को मत देना धोखा जानाँ [1]जब आँखों को…See More
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम् .. "
10 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"भाई लक्षण धामी 'मुसाफ़िर' जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से…"
13 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय निलेश शेगाँवकर साहेब सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए बहुत आभार .सही कहा…"
13 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')
"मोहतरमा उस्ताद समर कबीर साहिब जी, आपको मेरा प्रणाम, आपकी दाद मिल रही है, तो कोशिश सफल हुई, मैं…"
14 hours ago
dr neelam mahendra added a discussion to the group सामाजिक सरोकार
15 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

सशोधित ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह अगस्त 2020 :: एक प्रतिवेदन :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक ‘साहित्य संध्या’ 23 अगस्त 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई…See More
15 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
15 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. सालिक गणवीर जी,बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है .. कुछ नए आयाम भी हैं.. बधाई..मतले के सानी में…"
15 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"इस प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
18 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service