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सर्जिकल स्ट्राइक्स (कविता)

हमने बहुत समझाया
ये समझाने की हद थी,
उस कमबख्त को न
मानने की जिद्द थी,
हर बार हमले के बदले
आम और प्यार भेजा,
लेकिन नापाक ने हर बार
आंतकियों को सीमा पार भेजा,
अब तो हद हो गयी
उरी में सोये जवानों को जलाया,
दुनिया में आंतकी कहलाया,
वीरों ने ठान लिया अब इलाज
जरुरी है ताकि अहसास हो सके,
इसीलिए सर्जिकल स्ट्राइक्स
जरुरी था ताकि दहशत हो सके,
"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by harikishan ojha on October 6, 2016 at 9:37pm
आदरणीय अशोक कुमार जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद।
Comment by Ashok Kumar Raktale on October 6, 2016 at 4:15pm

आदरणीय हरिकृष्ण ओझा  जी  सादर, देश  के  वीर  सैनिकों  द्वारा की गई  सटीक सामयिक कार्यवाही  पर सुन्दर  रचना हुई  है.  बहुत-बहुत  बधाई. सादर.

Comment by harikishan ojha on October 6, 2016 at 1:08pm
आ. कल्पना जी आप का बहुत बहुत धन्यवादI
Comment by harikishan ojha on October 6, 2016 at 12:42pm
आ. सुरेश कुमार जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद हौसला अफजाई के लिएI
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 6, 2016 at 11:03am
सुन्दर रचना आदरणीय हरिकिशन ओझा जी बधाई हो ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 5, 2016 at 7:40pm

अच्छी कविता आदरणीया हरिकिशन ओझा जी बधाई आपको |

Comment by harikishan ojha on October 4, 2016 at 5:07pm
आ. शिज्जु "शकूर" जी आप का बहुत बहुत धन्यवादI

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 3, 2016 at 9:27pm
सामयिक विषय पर अच्छी कविता है आ. हरिकिशन ओझा जी बधाई आपको

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