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ग़ज़ल : दिल की बात आँखों से बताना...........

दिल की बात आँखों से बताना अच्छा लगता है.

झूठा ही सही पर आपका बहाना अच्छा लगता है.

 

छू जाती है धडकनों को मुस्कराहट आपकी,

 फिर शरमा के नज़रे झुकाना अच्छा लगता है.

 

मुरझे फूलों में ताजगी आती है आपको देखकर,

आप संग हो तो मौसम सुहाना अच्छा लगता है.

 

बिन बरसात के ही अम्बर में घिर आते है बादल,

आपकी सुरमई जुल्फों का लहराना अच्छा लगता है.

 

जंग तन्हाई के संग हम लड़ते है रात-दिन,

देर से ही सही पर आपका आना अच्छा लगता है.

 

ख्यालों के आईने में निहारते है तस्वीर आपकी,

नया लुक और रिश्ता पुराना अच्छा लगता है.

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Comment

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Comment by Noorain Ansari on June 7, 2011 at 11:33am
गणेश जी..प्रणाम..
बहूत बहूत धन्यवाद महाराज हौसला अफजाई खातिर..
मेरी ये अनवरत कोशिश रहेंगी की  ब्लॉग के अन्य लेखकों के लेख और कविताओं पे अपने कमेन्ट दिया करून..
क्योंकि यहाँ से बहूत कुछ सिखने को मिलता है..बहूत बिद्वान और प्रतिभाशाली कवि और लेखक है यहाँ पे ..जिनका कविता और लेख पढना मेरे लिए
सौभाग्य की बात होती है...बागी सर आपका तो मैं जबरदस्त फैन  हूँ.....
श्री कृष्ण नारंग...जी आपको भी बहूत बहूत धन्यवाद..
एक बार और धन्यवाद..
Comment by DR SHRI KRISHAN NARANG on May 26, 2011 at 10:39am
Wah! wah! Kya alfaaz hain. Marhaba, Noorain Sahib.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 26, 2011 at 10:13am
नोरैन साहिब बहुत ही अच्छी ग़ज़ल प्रस्तुत की है आपने , जंग तन्हाई वाला शे'र ज्यादा पसंद आया | दाद कुबूल करे | उम्मीद है आपकी और भी कृतियाँ और अन्य साथियों की कृतियों पर आपकी बहुमूल्य टिप्पणियाँ पढने को मिलती रहेंगी |

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