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वर्ष नया मंगलमय कहने

चले भी आओ की थोड़ी सी प्रीत निभा लें
वर्ष नया मंगलमय कहने की रीत निभा लें

कहना यह भी था कि
जाते साल के इतने तो उधार बाकी हैं
कुछ मुझ पर कुछ तुम पर उपकार बाकी हैं
शुकराने की सुरमय सरगम सजा लें
वर्ष नया मंगलमय कहने की रीत निभा लें

कहना यह भी था कि
कोई वादा अभी भी अधूरा सा है
आँखों में उम्मीद का चूरा सा है
वादे की हदों की हदें ही मिटा लें
वर्ष नया मंगलमय कहने की रीत निभा लें

कहना यह भी था कि
कुछ चुभने हैं बाकी जो कसकती भी हैं
और कि आँखें संग -संग बरसती भी हैं
चांदनी को चंदा का वास्ता दिला लें
.वर्ष नया मंगलमय कहने की रीत निभा लें

कहना यह भी था कि
अब के आंगन में आम बौराने को है
और यह भी कि कागा कगराने को है
कोयल को उसके नीड़ से हटा दें
वर्ष नया मंगलमय कहने की रीत निभा लें

कहना यह भी था कि
आओ चाह लें अब के हो ही जाए मंगल
बस्ती रह पाए बस्ती जंगल रह पाए जंगल
कबीलों को कन्दरा के कागद थमा दें
वर्ष नया मंगलमय कहने की रीत निभा लें

चले भी आओ की थोड़ी सी प्रीत निभा लें
वर्ष नया मंगलमय कहने की रीत निभा लें

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by rajesh kumari on January 18, 2017 at 11:05am
बढ़िया प्रस्तुति है आद०  अमिता जी। हार्दिक बधाई नव वर्ष की आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएँ।
Comment by Mahendra Kumar on January 2, 2017 at 10:16pm
बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया अमिता जी। नव वर्ष की आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएँ। सादर।
Comment by amita tiwari on January 2, 2017 at 10:00pm

 मान्य कबीर साहिब महेंद्र कुमार जी ,सुरेन्द्र जी

नया साल मुबारिक रहे .

इसी तरह हौंसला बढ़ाते रहें 

Comment by Samar kabeer on January 2, 2017 at 5:36pm
मोहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब,अच्छी लगी आपकी रचना,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mahendra Kumar on January 2, 2017 at 3:04pm
बढ़िया प्रस्तुति है आदरणीया अमिता जी। हार्दिक बधाई। सादर।
Comment by नाथ सोनांचली on January 2, 2017 at 8:46am
आद0 अमित तिवारी जी उत्तम सृजन,बधाई

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