For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -- 'दिनेश' तुम इतने बदल गये

1221--2121--1221--212

ख़तरे में जब वज़ीर था प्यादे बदल गए
मौक़ा परस्त दोस्त थे पाले बदल गये

आये न लौट कर वे नशेमन में फिर कभी
उड़ने को पर हुये तो परिन्दे बदल गये

होंठों पे इनके आज खिलौनों की ज़िद नहीं
ग़ुरबत का अर्थ जान के बच्चे बदल गए

हालाँकि मैं वही हूँ मेरे भाई भी वही
घर जब बँटा तो ख़ून के रिश्ते बदल गये

ढलने पे आफ़ताब है मेरे नसीब का
देखो ये मेरी आँखों के तारे बदल गये

लहजे में गुल-फ़िशानी न रंगे-जदीदियत
शेरो-सुख़न के सारे सलीक़े बदल गये

सागर को फ़त्ह करने चले थे तो नाख़ुदा
तूफ़ाँ को देखते ही इरादे बदल गये

मुद्दत के बाद देखा जो कल मैंने आइना
दिल कह उठा 'दिनेश' तुम इतने बदल गये

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 693

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ravi Shukla on June 7, 2017 at 2:17pm

आदरणीय दिनेश जी.बहुत ख़ूब! इस शानदार ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए बह्र लिखने में पहले रक्‍न में टंकण त्रुटि हो गई है

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 6, 2017 at 10:58pm
बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई आदरणीय हर एक शे'र लाजबाब..
Comment by Mahendra Kumar on June 5, 2017 at 8:32pm

वाह! वाह!! वाह!!! हर शेर एक से बढ़कर एक है. बहुत ख़ूब! इस शानदार ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए आ. दिनेश जी. बह्र मुझे लगता है आपने गलत लिख दी है. सादर.

Comment by दिनेश कुमार on June 5, 2017 at 5:21pm
शुक्रिया मुहतरम मोहम्मद आरिफ साहब। इनायत आपकी।
Comment by दिनेश कुमार on June 5, 2017 at 5:21pm
शुक्रिया मुहतरम मोहम्मद आरिफ साहब। इनायत आपकी।
Comment by Mohammed Arif on June 5, 2017 at 4:39pm
आदरणीय दिनेश कुमार जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र लाजवाब । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
19 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Tuesday
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service