For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सौगंध के बंधन ....

सौगंध के बंधन ....

मुझे
सब याद है
समय की गर्द में
कुछ भी तो नहीं छुपा
न तुम
न तुम्हारी
आँखों में आंखें डालकर
सात जन्मों तक
साथ निभाने की
सौगंध

चलते रहे
चलते रहे
साथ साथ
इक दूजे के दिल में
पुष्प भाव से गुंथे हुए
अर्थपूर्ण तृषा
और अर्थपूर्ण तृप्ति की
अभिलाष के साथ
इक दूसरे  के
अंतर्मन को छूते हुए

कब यथार्थ की नदी पर
एक किनारे ने
दूसरे किनारे को जन्म दे दिया
कुछ पता ही न चला

धीरे धीरे
हम का
विभाजन होने लगा
हमारा अस्तित्व
मैं और तुम के
किनारों में
परिवर्तित हो गया

सहर और सांझ का
खेल चलता रहा
शशांक
प्रणय को मचलता रहा
मैं शून्यता के
स्वरों को
अपनी आशा के दीपों से
प्रज्जवलित करती रही
ये जानते हुए भी कि तुम
अब शायद
लौट के न आओ

तुम अपने अहं के पाँव से
हर सौगंध को कुचल
चले गया
पर मैं न कुचल सकी
तुम्हारे स्पंदन
प्रणय पल
बिखरे हुए केश
और
टेबल पर रखा
अवसाद को जीता
काफ़ी का मग
जिसे उठा कर
तुमने खाई थी सात

सात जन्मों की सौगंध


तुमने भुला दी
पर मैं
बंधी रही
अपनी पलकों के किनारों पर
असंभव में
संभव को तलाशती
एक पराजित
सौगंध के बंधन में

अपने प्रणय को 

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 781

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2017 at 2:36pm

आ.सुनील प्रसाद जी सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का आभारी है। 

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2017 at 2:36pm

आ. विजय नोकोर साहिब सृजन के भावों को प्रशंसित करने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2017 at 2:36pm

आ.डॉ. गोपाल जी भाई साहिब आपके मुखारविंद से निकले आशीर्वचनों से सृजन उपकृत हुआ।  हार्दिक आभार सर।

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2017 at 2:36pm

आदरणीय मो. आरिफ़ साहिब सृजन के भावों को आत्मीय समर्थन देने का हार्दिक आभार। 

Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on June 24, 2017 at 2:02pm
बहुत ही भावपूर्ण रचना बधाई आपको ।
Comment by vijay nikore on June 24, 2017 at 11:13am

बहुत ही सुन्दर सर्जन किया है। बधाई, आदरणीय सुशील जी।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 23, 2017 at 9:23pm

वाह , आदरणीय सरना जी , बहुत  ही भावपूर्ण रचना . जय हो .

Comment by Mohammed Arif on June 23, 2017 at 8:40pm
आदरतीय सुशील सरना जी आदाब, बेहतरीन भावों की 'सौगंध के बंधन' से अनुबंधित रचना । बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
4 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
5 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
5 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
16 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
22 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service