For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अनकहा ...

कुछ तो
रहने दिया होता
मन की कंदराओं में
करवटें लेता
कोई भाव
अनकहा

क्या
ज़रूरी था
स्मृति पृष्ठ की
यादों को
नयन तीरों का
पता देना

आखिर
पता लग गया न
ज़माने को
सब कुछ
जो दबा के रखा था
दिल में
इक दूजे से
बांटने के लिए
सांझा दर्द
अनकहा

सांझ
कब तलक
तिमिर को रोकती
प्रतीक्षा की रेशमी डोरी
प्रभात की तीक्षण रश्मियों से
कमज़ोर पड़ने लगी
मैं उनींदीं सी
आधी जागी
आधी सोयी
अपने अधरों पे
छोड़ दिया
तुम्हारे स्पर्श से
जीवित करने के लिए
वो प्रणय शब्द
जो तुम्हारी प्रतीक्षा में
रह गया था
अनकहा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 476

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2017 at 2:38pm

आ. विजय नोकोर साहिब सृजन के भावों को प्रशंसित करने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2017 at 2:38pm

आ.डॉ. गोपाल जी भाई साहिब आपके मुखारविंद से निकले आशीर्वचनों से सृजन उपकृत हुआ।  हार्दिक आभार सर। 

Comment by vijay nikore on June 24, 2017 at 11:10am

//सांझ 
कब तलक 
तिमिर को रोकती 
प्रतीक्षा की रेशमी डोरी 
प्रभात की तीक्षण रश्मियों से 
कमज़ोर पड़ने लगी //

सुन्दर भावों से भरपूर रचना पढ़ कर आनन्द आ गया। हार्दिक बधाई, सुशील जी।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 23, 2017 at 9:27pm

सुन्दर ! अति सुन्दर , सुकुमार भावों के  धनी हैं आप आ० सरना  जी

Comment by Sushil Sarna on June 23, 2017 at 6:44pm

आदरणीय मो. आरिफ साहिब सृजन को अपनी मधुर प्रशंसा से शोभित करने का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 23, 2017 at 6:44pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार।

Comment by Mohammed Arif on June 23, 2017 at 2:47pm
आदरणीय सुशील सरना जी आदाभ, बहुत ही सुंदर भावों की 'अनकही'। हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by narendrasinh chauhan on June 23, 2017 at 1:17pm

बहोत खूब 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
1 hour ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service