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2222 2222 222
दूरी अपने बीच मिटा भी नहीं सकता।
आना चाहूँ तो मैं आ भी नहीं सकता।

मैं तुझ से मिलने को आ भी नहीं सकता।
क्या दिल पे गुजरती है बता भी नहीं सकता।।

बेईमानी से मैं कमा भी नहीं सकता।
भूखा बच्चों को मैं सुला भी नहीं सकता।।

मैं इतना दूर चला आया हूँ उस से।
वो आना चाहे तो आ भी नहीं सकता।

पहले से दुख इतने हैं मेरे अंदर।
और कोई दिल मेरा दुखा भी नहीं सकता।।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by surender insan on August 1, 2017 at 9:11am
जी आदाब मोहतरम समर कबीर साहब। बेहद दिली शुक्रिया आपका जी।
आदरणीय किर्पया बताये जी थोड़ा विस्तार से जी ।


आदरणीय कोई एक शेर देखे जी जैसे कि यह।

मैं उस से इतना दूर चला आया हूँ।
वो आना चाहे तो आ भी नहीं सकता।।

क्या लय के आधार पर ही यह बह्र से ख़ारिज है जी? इस में केवल सानी में भी' में मात्रा पतन है जी। ताकि इस बह्र में आगे बढ़ सकूँ जी।
Comment by Samar kabeer on July 26, 2017 at 4:07pm
जनाब सुरेश इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।
आपकी पूरी ग़ज़ल बह्र में नहीं है,इस हेतु पटल पर आलेख मौजूद हैं उनका अध्यन करें ।
मेरे ब्लॉग पर इस बह्र में कुछ ग़ज़लें हैं,उनपर आई टिप्पणियां भी हैं जो आपको इस बह्र को सीखने में मददगार होंगी,उनका भी अध्यन करें ।
Comment by surender insan on July 26, 2017 at 4:02pm
जी आदाब आदरणीय रवि शुक्ला जी। बेहद शुक्रिया आपका जी।
आदरणीय किर्पया बताये जी थोड़ा विस्तार से जी ।


आदरणीय यह शेर देखे जी ।

मैं इतना दूर चला आया हूँ उस से।
वो आना चाहे तो आ भी नहीं सकता।


क्या इसमें सानी में अटकाव या लय बाधित है जी? सादर जी।
Comment by surender insan on July 26, 2017 at 3:33pm
जी आदाब आदरणीय रवि शुक्ला जी। बेहद शुक्रिया आपका जी।
आदरणीय किर्पया बताये जी थोड़ा विस्तार से जी ।


आदरणीय यह शेर देखे जी ।
क्या इसमें सानी में अटकाव या लय बाधित है जी? सादर जी।
Comment by surender insan on July 26, 2017 at 3:30pm
जी बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय बसन्त कुमार शर्मा जी।
Comment by Ravi Shukla on July 26, 2017 at 1:17pm

आदरणीय सुरेन्‍द्र जी गजल का प्रयास ठीक है पर इस बहर मे कथ्‍य के साथ महत्‍वपूर्ण बात है लय जिसके बिना ये बहर कारगर नहीं होती आपकी गजल में लय को और बेहतर करने की गंजाइश है अभी । सादर

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 26, 2017 at 12:57pm

बहुत खूब 

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