For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

इश्क़ की ज़ुबाँ....संतोष

इश्क़ की ज़ुबाँ को तूने किस क़दर आसां कर दिया,
कह न सका कभी, वो निगाहों से बयाँ कर दिया.

दिल में मुरझाये से अरमां थे मिरे,
निगाहों ने तिरे उन्हें फिर जवाँ कर दिया.

अब तो हवाओं में भी आती है ख़ुशबू तिरी,
बंजर था ये दिल मेरा,तूने गुलिस्ताँ कर दिया.

पाना था तुझे जो रुका भी नहीं मंज़िल तलक मैं,
चाहतों ने तिरे इस दुश्वार सफ़र को और आसां कर दिया.

फ़ैसला जब था मेरा तुम्हारा, तो फिर ये ऐतराज़ कैसा,
दुनियाँ वालों ने फिर क्यूँ जीना मेरा मुहाल कर दिया.

इश्क़ में ये कैसा इंतक़ाम है मुझसे तिरा,
रक्ख़ा ख़ुद को भी अकेला तूने,मुझे तनहा कर दिया.
#संतोष खिरवड़कर
[मौलिक एवं अप्रकाशित]

Views: 632

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by santosh khirwadkar on August 4, 2017 at 7:41pm

आदरणीय समर साहब, प्रणाम सहित धन्यवाद एवं आभार ! 

Comment by santosh khirwadkar on August 4, 2017 at 7:38pm

आदरणीय नीलेश जी , आप को धन्यवाद एवं आभार ! अभी इस मंच पर प्रशिक्षु के रूप में नविन सदस्यता ग्रहण की है ! और आप के कहे मुताबिक मैं प्रयत्न भी कर रहा हूँ ! किन्तु निवेदन चाहूंगा कि कृपया रचना /कविता /ग़ज़ल में आप का मार्गदर्शन भी समय-समय पर मिलता रहे!

Comment by santosh khirwadkar on August 4, 2017 at 7:26pm

आदरणीय सुरेंद्र जी नमस्कार , आप का ह्रदय से धन्यवाद एवं आभार !

Comment by Samar kabeer on August 4, 2017 at 6:54pm
जनाब संतोष जी आदाब,भावपूर्ण रचना की बधाई स्वीकार करें ।
जनाब निलेश जी की बातों पर ध्यान दें ।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on August 4, 2017 at 11:16am
आ संतोष दादा,
भावपूर्ण रचना के लिये बधाई।
मंच पर ग़ज़ल की कक्षा में ग़ज़ल के विधान और नियमों का विस्तार से उल्लेख है, आप पढ़कर लाभान्वित हो सकते हैं।
सादर
Comment by नाथ सोनांचली on August 4, 2017 at 4:39am
आद0 संतोष खिरवड़कर साहब आदाब, अच्छे अशआर कहे आप, शेष गुणीजन बताएंगे। मेरी बधाई लीजिये। सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
13 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service