For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल

सर पे कैसी मुसीबत बड़ी आ गई।
देखिये फैसले की घड़ी आ गई।

साँस लेना मुनासिब भी लगता नही
ये हवा किस कदर नकचढ़ी आ गई।

दिल के साँपो को हम मार पाते नहीं,
साँप आया जो घर इक छड़ी आ गई।

ईंट पत्थर लगाकर मकां जब बना
लो हिफाजत को उसके कड़ी आ गई।

अब चमन में कहीं फूल खिलते नहीं,
पतझरों की अजब सी लड़ी आ गई।

रौशनी के लिए 'मन' मचलने लगा,
उसको बहलाने को फुलझड़ी आ गई।

मंजूषा मन

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 893

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by मंजूषा 'मन' on August 19, 2017 at 6:27pm
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण जी
Comment by मंजूषा 'मन' on August 19, 2017 at 6:25pm
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय नरेन्द्र जी
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 17, 2017 at 11:23am
आदरणीया मंजूषा जी, अच्‍छी गजल कही आपने मुबारक बाद कुबूल करें ।
Comment by narendrasinh chauhan on August 16, 2017 at 7:09pm

सुन्दर रचना 

Comment by मंजूषा 'मन' on August 16, 2017 at 4:32pm
हौसला अफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया जनाब मुहम्मद आरिफ साहब
Comment by मंजूषा 'मन' on August 16, 2017 at 4:31pm
बहुत बहुत शुक्रिया जनाब सुरेन्द्र साहब आपने हौसला बढ़ाया
Comment by मंजूषा 'मन' on August 16, 2017 at 4:29pm
बहुत बहुत शुक्रिया जनाब कबीर साहब
Comment by मंजूषा 'मन' on August 16, 2017 at 4:28pm
बहुत बहुत जनाब कबीर साहब... आपके द्वारा बताया काफिया दोष दूर करने का प्रयास करेंगे... आपकी इस्लाह से ग़ज़ल मुकम्मल हो सकेगी
Comment by मंजूषा 'मन' on August 16, 2017 at 4:25pm
बहुत बहुत शुक्रिया जनाब आशुतोष साहब
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 16, 2017 at 12:50pm
सुन्दर ग़ज़ल हुई आदरणीया..बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
13 hours ago
Sushil posted blog posts
13 hours ago
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
13 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service