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"आज़ादी का गीत"
(2212 122 अंतरा 22×4 // 22×3)
(तर्ज़- दिल में तुझे बिठा के)

भारत तु जग से न्यारा, सब से तु है दुलारा,
मस्तक तुझे झुकाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।

सन सैंतालिस मास अगस्त था, तारिख पन्द्रह प्यारी,
आज़ादी जब हमें मिली थी, भोर अज़ब वो न्यारी।
चारों तरफ खुशी थी, छायी हुई हँसी थी,
ये पर्व हम मनाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।

आज़ादी के नभ का यारों, मंजर था सतरंगा,
उतर गया था जैक वो काला, लहराया था तिरंगा।
भारत की जय थी गूँजी, अनमोल थी ये पूँजी,
सपने नये सजाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।

बहुत दिये बलिदान मिली तब, आज़ादी ये हमको,
हर कीमत दे इसकी रक्षा, करनी है हम सबको।
दुश्मन जो सर उठाएँ, उनको सबक सिखाएँ,
मन में यही बसाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।

भारत तु जग से न्यारा, सब से तु है दुलारा,
मस्तक तुझे झुकाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Shyam Narain Verma on August 17, 2017 at 3:48pm
बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को आदरणीय | सादर 
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on August 16, 2017 at 11:49am
आ0 मोहम्मद आरिफ जी आपने जश्ने आज़ादी के गीत में शिरकत की और बधाई से नवाजा आपका हृदय से आभार।
Comment by Mohammed Arif on August 15, 2017 at 7:48pm
आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी आदाब,जश्ने आज़ादी की गरिमा-गौरव और महत्व को रेखांकित करता बहुत ही प्यारा गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । जश्ने आज़ादी की बधाई ।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on August 15, 2017 at 6:53pm
आदरणीय समर साहिब आपका हृदय तल से आभार।
Comment by Samar kabeer on August 15, 2017 at 6:11pm
जनाब बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी आदाब,यौम-ए-आज़ादी पर अच्छा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
पहले बन्द के अंत में मात्रा पूरी करने के लिये 'तारीख़' को "तारिख"लिखा है आपने ?

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