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इक तेरे जाने के बाद...........

कोई भी लगता नहीं अपना , तेरे जाने के बाद
हो गया ऐसा भी क्या , इक तेरे जाने के बाद १
ढूँढता रहता हूँ , हर इक सूरत में
खो गया मेरा भला क्या , इक तेरे जाने के बाद २
न महफिलें कल थी , ना है दोस्त आज भी कोई
अब मगर तन्हा बहुत हूँ , इक तेरे जाने के बाद ३
बिन बुलाए ख़ामोशी , तन्हाई , बे -परवाहपन
टिक गये हैं घर में मेरे , इक तेरे जाने के बाद ४
पूँछते हैं सब दरोदिवार मेरे , पहचान मेरी
अब तलक लौटा नहीं घर , इक तेरे जाने के बाद ५
तोड़ कर सब रख दिए मैंने , "दिए" बरसात में
दिल मगर जलने दियाइक, इक तेरे जाने के बाद
कैसा थामैं , मालूम तुमको ? इक तेरे आने से पहले
कैसा हूँ मैं , मालूम है , इक तेरे जाने के बाद ५
"अजय"
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by ajay sharma on August 29, 2017 at 11:10pm

sir ji koshish kar raha hoo....katipay  karano se OBO se door raha ......ab prayas karoonga ......apki hausla afzai ke liye bahut bahut dili shukriya

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 29, 2017 at 1:09pm

इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय |

Comment by Samar kabeer on August 29, 2017 at 12:33pm
जनाब अजय जी आदाब,अगर ये ग़ज़ल है तो आपको अभी बहुत अभ्यास और अध्यन की ज़रूरत है,ओबीओ मंच पर ग़ज़ल की कक्षा और ग़ज़ल की बातें समूह का लाभ उठायें ।
इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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