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ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )

ग़ज़ल (अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम )

-----------------------------------------------------

(फ़ाइलुन -फ़ाइलुन -फ़ाइलुन -फ़ाइलुन)

 

अपनी तक़दीर फिर आज़माएँगे हम |

उनके कुचे से वापस न जाएँगे हम |

 

ज़ुल्म कितने भी ढा ले सितमगार तू

ग़म के हर दौर में मुस्कराएँगे हम |

 

आपको तो अज़ीज़ों से फ़ुर्सत नहीं

किस तरह हाल दिल का सुनाएँगे हम |

 

जब भी मिलता है देता है वो ज़ख़्मे नौ

दस्त उलफत का कब तक मिलाएँगे हम |

 

जब तअस्सुब की आँधी चलाएँगे वो

तब चरागे मुहब्बत जलाएँगे हम |

 

हाकिमे वक़्त आवाज़ ,हक़ के लिए

चाहे अंजाम कुछ हो उठाएँगे हम |

 

वक़्ते रुखसत है सीने से लग जाइए

लौट कर अब न तस्दीक़ आएँगे हम |

 

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 19, 2017 at 9:33am
जनाब अफ़रोज़ सहर साहिब,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Afroz 'sahr' on September 18, 2017 at 2:32pm
आदरणीय तस्दीक़ जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए दाद पेश करता हूँ ! कुबूल करें !
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 18, 2017 at 1:17pm

मुहतरम जनाब  समर कबीर  साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 18, 2017 at 1:16pm

 जनाब  ब्रजेश कुमार  साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 18, 2017 at 1:15pm

मुहतरम जनाब  गिरिराज साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया      

Comment by Samar kabeer on September 17, 2017 at 11:15pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 16, 2017 at 7:57pm
बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय..हर एक शेर लाजबाब

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 16, 2017 at 6:10pm

बहुत खूब , आदरणीय तस्दीक भाई , ग़ज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 16, 2017 at 6:02pm
मुहतरम जनाब शकूर साहिब ,आपकी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 16, 2017 at 6:00pm
जनाब नीलेश नूर साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया। ध्यान दिलाने का शुक्रिया।

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