For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-७०

विश्वास के सतूने जब कमज़ोर होते हैं तो आस्था का शामियाना गिर ही जाता

-------------------------------------------------------------------------------------

हमारे घर का एक कोना फिर से पूजा स्थल के रूप में तब्दील हो गया और मेरी पत्नी ने एक निस्सहाय धर्म-केन्द्रित याचिका का रूप ले लिया. घर की मुश्किलात जैसे जैसे बढ़ती गईं, वैसे वैसे पत्नी की आध्यात्मिकता ने धार्मिक आचरणों, अर्चनाओं, उपवासों इत्यादि का रुख कर लिया. भविष्य वाचकों की भविष्यवानियाँ सुनी जाने लगीं और ग्रह नक्षत्रों की गतियाँ खंगाली जाने लगीं. बात यहीं तक नहीं रुकी, तथाकथित बाबाओं, ओझाओं, मौलवियों, एवं पंडित पुरोहितों से भी मुलाकातें की गईं और उनके बताएं उपायों एवं गंडे-तावीजों को आज़माया गया. विश्वास के सतूने जब कमज़ोर होते हैं तो आस्था का शामियाना गिर ही जाता है. मगर हर तरह से आर्थिक आपदाओं से घिरी एक पतिव्रता क्या करे?

 

मैं जैसा था वैसा ही रहा, धार्मिक उपक्रमों से निस्पृह एवं आध्यात्मिक प्रयासों से उदासीन; हाँ, अभ्यंतर में प्रार्थनाएँ जारी रहीं और कभी कभार मालिक को अपनी ध्वस्त होती गृहस्थी का हाल लिख दिया. चिंताएं हम पति पत्नी के लिए बराबर थीं और आसन्न विपदाओं का भय भी समान. मगर ये भी सच है कि मेरे अपेक्षाकृत शांत मन में कभी कभी चिंताओं के भूचाल आते थे और एक अज्ञात विद्रोह का बिगुल बज उठता था. मगर यह सब क्षणिक था.   

 

~ राज़ नवादवी 

भोपाल २१/०९/२०१७ १२:४७ पी एम

"मौलिक एवं अप्रकाशित" 

Views: 412

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by राज़ नवादवी on September 25, 2017 at 6:46pm

आदरणीय जनाब समर कबीर साहब, आपकी बातों को पढ़कर बहुत हौसल अफज़ाई हुई, ख़ुदा से मेरे लिए आपकी दुआएँ मेरी ख़ुशनसीबी है. आपका मशकूर हूँ. जी आपने जैसा फरमाया है, सुतून कर लूँगा. सादर 

Comment by Samar kabeer on September 25, 2017 at 5:39pm
जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,आपकी आप बीती पढ़ी,आपकी परेशानियों से तो मैं पहले ही वाक़िफ़ हो चूका हूँ इसलिये आपकी मनोदशा को समझ सकता हूँ,'मुश्किलें इतनी पड़ीं मुझ पर कि आसाँ हो गईं',किसी भी मुश्किल का सामना हिम्मत से ही होता है,और आप एक बा हिम्मत इंसान हैं,मैं आपके लिए दुआगो हूँ ।
दसवीं पंक्ति में 'सतूने' शब्द को "सुतून" कर लीजियेग ।
Comment by राज़ नवादवी on September 25, 2017 at 2:18pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी, आपका ह्रदय से आभार. सादर 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 25, 2017 at 12:28pm
बहुत बढ़िया आदरणीय राज जी..पारवारिक परिस्थितियों से उत्पन्न मानसिक उहापोह को बहुत शानदार ढंग से अभिव्यक्त किया है..सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
3 hours ago
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
5 hours ago
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service