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ग़ज़ल -दुश्मनों को मिटा’ देना यही’ काल अच्छा है

काफिया : आल ; रदीफ़ अच्छा है

बहर : २१२२  ११२२  ११२२  २२(११२)

      ११२२

दुश्मनों को मिटा’ देना यही’ काल अच्छा है

खुद करो भूल, अदू को सज़ा’ ख्याल अच्छा है |

नाम है रहनुमा’ क्या राह दिखाई  किसी’ को

झूठ पर झूठ, तुम्हारा ये’ कमाल अच्छा है |

आज कोई नहीं’ सुनते किसी’ की  दुनिया में

उत्तरी कोरिया’ का बम्ब धमाल अच्छा है |

चाँद में दाग है’, मालूम है’ दुनिया को भी

प्रियतमा मेरी' तो' बेदाग़ जमाल अच्छा है |

खाद्य द्रव्यों में’ मिलावट,अनियंत्रित हो’गई 

और कहते हैं,कि बाज़ार में' माल अच्छा है |

वादा' जो भी किया’ उसको न निभाया तो क्या

कुछ मिले ना सही’ पाने का ख़याल अच्छा है |

देश में आमदनी और खपत  कैसी हो   

अर्थ आयोग नया खूब निहाल अच्छा है |

वक्त अनुकूल है’ ऐसा कहा’ नेता जी ने

बीते’ कालों से’ अभी का यही’ काल अच्छा है |

काला’ धन सब हो’ गया लुप्त, कि “काली” भी चुप

पूछने वाला’ भी’ चुप किन्तु, सवाल अच्छा है |

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 4, 2017 at 11:04pm

आदरणीय समर कबीर साहिब ,आदाब  शेर दर शेर विस्तृत विश्लेषण एवं मार्ग दर्शन के तहे दिल से शुक्रिया | नपुंसक लिंग में कुछ को हिंदी में स्त्रीलिंग में लिया है , उन्ही में गलतियां होती है| नियमों की कई किताब पढ़ी परन्तु पूर्ण रूप से सभी शब्दों में नियम लागू नहीं होता वहां अपवाद कहकर छोड़ देते हैं . गलतियां वहीँ ज्यादा होती है | हिंदी भाषी को आदत होती है इसीलिए उनको परेशानी नहीं है | समय लग सकता है लेकिन सुधार लेगे | सादर |

Comment by Samar kabeer on October 3, 2017 at 7:26pm
जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,
मतले का सानी मिसरा लय में नहीं है,देखियेगा ।

'नाम है रहनुमा,क्या राह दिखाया किसी को'
इस मिसरे में 'राह'शब्द स्त्रीलिंग है, इसलिये 'दिखाया'नहीं "दिखाई" कहेंगे ।
'आज कोई नहीं सुनता किसी को दुनिया में'
इस मिसरे में 'कोई नहीं सुनता किसी की'सही व्याकरण है ।
चौथे शैर का सानी मिसरा लय में नहीं है ।
पांचवें शैर के ऊला मिसरे के अंत में 'हो गया'पुल्लिंग हो रहा है,और मिस्र में स्त्रीलिंग शब्द हैं,इसलिये 'हो गई'होना चाहिये,इस के सानी मिसरे में एक शब्द कम है :-
'और कहते हैं कि बाज़ार में माल अच्छा है'
छटे शैर के ऊला मिसरे में 'वायदा' ग़लत शब्द है,सही शब्द है"वादा" ।

'देश में आमदनी और खरच कैसे हो
अर्थ आयोग नया खूब निहाल अच्छा है'
इस शैर के ऊला मिसरे में 'खरच'शब्द ग़लत है,सही शब्द है"ख़र्च"और सानी मिसरा शिल्प और शब्द कल के कारण सही भाव नहीं दे सका ।

आप जब तक भाषा व्याकरण शिल्प पर अपनी पकड़ मज़बूत नहीं करेंगे ऐसी ग़लतियाँ बार बार होती रहेंगी,बहतर यही है कि ओबीओ पर मौजूद आलेखों का अध्यन ग़ौर से करें यही निवेदन मैं आपसे पहले भी करता रहा हूँ ।
Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 3, 2017 at 1:23pm

आ समर कबीर साहिब आदाब , बेसब्री से आपका इंतज़ार रहेगा , सादर 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 3, 2017 at 1:21pm

जनाब अफरोज सह्र' जी  आपकी स्नेहिल उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार |

Comment by Kalipad Prasad Mandal on October 3, 2017 at 1:19pm

आ सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुरुक्षेप ' आपकी स्नेहिल उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार |

Comment by Afroz 'sahr' on October 2, 2017 at 3:58pm
जनाब काली प्रसाद जी ग़ज़ल की अच्छी कोशिश है।बधाई आपको बाकी गुणीजनों के आने की प्रतिक्षा करें सादर
Comment by Samar kabeer on October 2, 2017 at 3:06pm
जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,विस्तृत टिप्पणी के लिए पुनः वापस आता हूँ ।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 2, 2017 at 4:42am
आद0 कालीपद जी ग़ज़ल का अच्छा प्रयास। बधाई आपको।।शेष गुणीजन बताएंगे। सादर
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 2, 2017 at 4:41am
आद0 कालीपद जी ग़ज़ल का अच्छा प्रयास। बधाई आपको।।शेष गुणीजन बताएंगे। सादर

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