For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल --पाक आतंकी कभी बाज़ आएँ क्या

काफिया : आएँ , रदीफ़: क्या 

२१२२  २१२२  २१२

पाक आतंकी कभी बाज़ आएँ क्या

बारहा दुश्मन से’ धोखा खाएँ क्या ?

गोलियाँ खाते ज़माने  हो गये 

राइफल बन्दुक से’ हम घबराएँ क्या ?

जान न्योछावर शहीदों ने की’ जब

सरहदों को हम मिटाते जाएँ क्या ?

सर्जिकल तो फिल्म की झलकी ही’ थी

फिल्म पूरा अब मियाँ दिखलाएँ क्या ?

आपका विश्वास अब मुझ पर नहीं

अनकही बातें जो’ हैं बतलाएँ क्या ?

खो दिया है सब्र जिसने बेवज़ह

बेसब्री को और हम भड़काएँ क्या ?

बेवज़ह करता अदावत मसखरा

ना समझ को और हम समझाएँ क्या ?

बोलते हैं झूठ हरदम रहनुमा

झूठ का बाज़ार है झुठलायें क्या ?

बावफा नादान है, गलती की’ है

बज़्म में ‘काली’ अभी बुलवाएँ क्या ?

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 368

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 26, 2017 at 12:25pm

आ. मण्डल जी,
अच्छा प्रयास हुआ है..समर सर कह ही चुके हैं...
मेरी  दिक्कत शीर्षक  को लेकर  है ..

पाक आतंकी कभी बाज़ आएँ क्या..
ये शब्द पाक आतंकी वर्तमान मीडिया ने हमारे मुँह में ठूँस दिया है... पाकिस्तानी आतंकी को पाक (पवित्र) आतंकी बना दिया है.
आतंकी कहीं के भी हो, किसी भी मुल्क, मज़हब के हों.. नापाक ही रहेंगे अत: एक ग़ज़लकार के रूप में ऐसे भ्रांतिपूर्ण शब्दों से बचना चाहिए..
सादर 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on September 26, 2017 at 12:11pm

आदरणीय समर कबीर साहिब सादर आदाब , आपकी नज़र से बच नहीं पाई बात | आपने सही कहा यह ग़ालिब की जमीन पर लिखी गई है |आज कल मैं ग़ालिब की गजलों का अध्ययन कर रहा हूँ | उसके आधार पर जो कुछ बनता है लिखने की कोशिश करता हूँ | लेकिन ग़ालिब की रचना में भी, ओ बी ओ में प्रकाशित नियमो के मुताबिक़ कई दोष नज़र आये | इसके बारे में आपसे परामर्श  बाद में किसी दिन करेंगे | फिलहाल अपने जो विन्दुवत टिप्पणी  और सलाह दी , उसके लिए आपका सादर आभार | वास्तव में मैं ऐसा ही टिप्पणी  चाहता हूँ जिससे कुछ सिखने के लिए मिले|  रचना को समय देने के लिए सादर आभार |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 25, 2017 at 10:41pm

बहुत अच्छी ग़ज़ल | बधाई आदरणीय |

Comment by Samar kabeer on September 25, 2017 at 3:00pm
जनाब कालीपद प्रसाद जी आदाब,ग़ालिब की ज़मीन में ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।
'राइफल बन्दुक से हम घबराएँ क्या'
ये मिसरा लय में नहीं है,'बन्दुक'ग़लत शब्द है,सही शब्द है "बन्दूक़",इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं :-
'राइफ़ल बन्दूक़ से घबराएँ क्या'

'फ़िल्म पूरा अब मियाँ दिखलाएँ क्या'
इस मिसरे में 'फ़िल्म'शब्द स्त्रीलिंग है, देखियेगा ।
'बेसब्री को और हम भड़काएँ क्या'
ये मिसरा लय में नहीं है ।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on September 25, 2017 at 4:48am
आदरणीय कालीपद प्रसाद जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल का उम्दा प्रयास । बधाई स्वीकार करें । शेष गुणीजनों के हवाले।
Comment by Mohammed Arif on September 24, 2017 at 7:59am
आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब, ग़ज़ल का एक च्छा प्रयास । बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों के आने का इंतज़ार करें।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 23, 2017 at 4:36pm

आदरणीय काली प्रसाद जी वर्तमान में घटित घटनाओं का बढ़िया जिक्र है इस ग़ज़ल में  इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"बात सबको ये जमाने में बतानी चाहिए दोस्ती की है तो जां देकर निभानी चाहिए ज़ख्म ये नासूर बन जाए न…"
2 hours ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"       2122 2122 2122 212   दर्द की धुन को भी लफ़्ज़ों की रवानी चाहिए गीत सी…"
3 hours ago
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जिंदगी को और क्या केवल रवानी चाहिए।राह के हर मोड़ पर दिलकश कहानी चाहिए।।१।। दुश्मनों की दुश्मनी…"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"स्वागत है"
3 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"."
3 hours ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब आदाब बहुत बहुत शुक्रिया आपका अपने क़ीमती वक़्त और  सलाह…"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"//दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'     था सलामत मुआहिदा कोई//    इस…"
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, देरी से प्रतिक्रिया देने की कुछ वजूहात रही होंगी मैं समझ सकता…"
4 hours ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय नीलेश जी मैं बहुत शर्मिंदा हूँ और मुआफ़ी चाहता हूँ इस देरी के लिए  आपका बहुत बहुत…"
5 hours ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी नमस्ते  मुआफ़ी चाहता हूँ देरी से आने के…"
5 hours ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय रूपम kumar 'मीत ' जी नमस्ते मैं देरी से हाजिर होने के लिए मुआफ़ी चाहता…"
6 hours ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय अमीरुद्दीन  'अमीर ' साहब आदाब बहुत मुआफ़ी चाहता हूँ इस देरी के लिए ! आदरणीय…"
6 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service