For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वजन - 212 212 212 212

..... " शायरी " .........

मेरे रुख़ की हँसी कौन है , शायरी .....
मेरी जां जिंदगी कौन है , शायरी ....

बेवफ़ाओं के पत्थर दिलों में यहाँ
कील बनकर चुभी कौन है , शायरी.......

ऊँचे उड़ते दिखे है परिंदे , मगर
इन से ऊँची उड़ी कौन है , शायरी ...

मैं अकेला नहीं जागता रातभर
संग फिर जागती कौन है , शायरी ....

ग़म भरे तम दिलों में मेरे दोस्तों
दीप बनकर जली कौन है , शायरी ....

अपने है , दोस्त है , है सनम भी , मगर
मेरे ग़म बाँटती कौन है , शायरी .......

" प्रेम " को यूँ तो सब जानते है , मगर
अच्छे से जानती कौन है , शायरी .....

पंकजोम " प्रेम "......
( मौलिक और अप्रकाशित "

Views: 66

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by पंकजोम " प्रेम " on November 22, 2017 at 1:11pm
आपके आशिर्वाद का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा समर कबीर जी , अफरोज़ जी , उस्मानी जी ..... और निखार लाने का प्रयास करता हूँ
Comment by Samar kabeer on November 22, 2017 at 12:25pm
जनाब पंक्जोम "प्रेम"साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी और समय चाहती है,कई अशआर के ऊला मिसरे सानी मिसरे से रब्त पैदा नहीं कर सके,इस कारण रदीफ़ से पूरा इंसाफ़ नहीं हो सका,देखियेगा ,इस प्रस्तुति के लिए बधाई आपको ।
Comment by Afroz 'sahr' on November 22, 2017 at 12:04pm
आदरणीय पंकजोम प्रेम जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको । रदीफ़,,, "कौन है शायरी" ज़ू, मानी दे रही है ,,देखिएगा सादर,,
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 21, 2017 at 9:57pm
जज़्बात बयां करती दिलचस्प ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब पंकजोम 'प्रेम' साहिब। शायरी का चरित्र-चित्रण।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"आ. राजेश दी, सादर अभिवादन । सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
19 minutes ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post लेकिन कज़ा के बाद से मक़तल उदास है
"आदर्णीय बहुत खूबसूरत.ग़ज़ल आपने कही है । हार्दिक बधाई।"
25 minutes ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- इक फ़रिश्ता है मेहरबाँ मुझ पर / दिनेश कुमार / ( इस्लाह हेतु )
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। हार्दिक बधाई"
28 minutes ago
Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post बोलती निगाहें (लघुकथा)
"आदरणीय उस्मानी जी, नमस्कार।  आज के समय से सामंजस्य बिठाती अच्छी लघु कथा।  बधाई स्वीकार…"
1 hour ago
ram shiromani pathak commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(2122 1212 22)
"नीलेश भाई बहुत बहुत आभार अपकल"
5 hours ago
ram shiromani pathak commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(2122 1212 22)
"आरिफ़ भाई  उत्साह वर्धन हेतु आभार आपका"
5 hours ago
ram shiromani pathak posted a blog post

ग़ज़ल 212×4

ख्वाब थे जो वही हूबहू हो गए।जुस्तजू जिसकी थी रूबरू हो गए।।इश्क करने की उनको मिली है सज़ा।देखो बदनाम…See More
5 hours ago
Shyam Narain Verma commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"वाह बेहद खूबसूरत प्रस्तुति … हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों वक़्त के रहबर का तमाशा देखो)
"जनाब रामअवध साहिब, ग़ज़ल मेंआपकी शिर्कत  और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |"
8 hours ago
ram shiromani pathak commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(2122 1212 22)
"ग़ज़ल।। मुंतजिर हूँ मैं इक जमाने से।मिलने आ जा किसी बहाने से।। आ जा मिलने भी ठीक लग रहा है मुझे उनकी…"
10 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों वक़्त के रहबर का तमाशा देखो)
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। सभी शेर बोलते हुये हैं। आदर्णीय बधाई"
21 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"आदरणीय सत्ताधीशों द्वारा ठगी गई भोलीभाली जनता का दुख दर्द बयान करती हुई सार्थक ग़ज़ल कहने के लिये…"
21 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service