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ग़ज़ल -सूरते जान जो'रौनक वो, कही' नूर नहीं - कालीपद 'प्रसाद'

सूरते जान जो'रौनक वो, कही' नूर नहीं 

यह अलग बात है दुनिया में' वो मशहूर नहीं 

प्यार करता हूँ’ मैं’ पागल की’ तरह पर क्या’ करूँ

हर समय प्यार जताना उसे’ मंज़ूर नहीं |

सांसदों में अभी’ दागी हैं’ बहुत से नेता

दाग धोना बड़ा’ दू:साध्य है’, नासूर नहीं |

चाह ऐसी कि सज़ा सबको’ मिले जो दोषी

पर सज़ा सबको’ मिले ऐसा’ भी’ दस्तूर नहीं |

लोक सरकार अभी, राज है’ जनता का यह

हैं सभी स्वामी’ यहाँ ,कोई’ भी’ मजदूर नहीं |

देखने में तो'' महरबां लगे सारे  नेता

किन्तु दिल से तो' को’ई भी कभी' अक्रूर नहीं |

थाम कर स्वांस प्रतीक्षा की’ है’ अच्छे दिन का

की है’ जो कोशिशें’ लगता है’ वो’ दिन दूर नहीं |

बन सितारा यहीं ‘काली’ कि गगन नाप लिया

आफताबी है’ चमक पर  कभी मगरूर नहीं  |

‘अक्रूर= दयाबान, कृपालु

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 21, 2017 at 8:36pm

ग़ज़ल पर शिरकत करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया आ लक्षण धामी जी 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 21, 2017 at 8:35pm

ग़ज़ल पर शिरकत करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया आ नवीन मणि जी 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 21, 2017 at 8:33pm

हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया आ सतविंदर कुमार जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 20, 2017 at 11:33pm

हार्दिक बधाई ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on December 20, 2017 at 2:04pm

वाह बहुत खूब । आ0 समर साहब की इस्लाह कीमती है । 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 19, 2017 at 9:27pm

आद कालीपद प्रसाद मंडलजी  हार्दिक बधाई स्वीकारें इस गजल के लिए 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 19, 2017 at 8:04pm

आ सलीम रज़ा रेवा साहिब ,आदाब , ग़ज़ल पर शिरकत करने और हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 19, 2017 at 8:01pm

आदरणीय तस्दीक अहमद साहिब , आदाब  आपने मेरा काम आसान कर दिया | पता नही" नूर " शब्द मेरे दिमाग में आया क्यों नहीं | आपके सुझाव पर विचार करता हूँ | इस्लाह के लिए तहे दिल से शुक्रिया | आदाब 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 19, 2017 at 7:55pm

आदरणीय समीर कबीर साहिब , आदाब ,ग़ज़ल को गहराई से विश्लेषण करने और रचनात्मक सुझाव देने के लिए तहेदिल से शुक्रिया | वैसे मतले में मुझे भी संदेह था पर उपयुक्त शब्द नहीं मिल रहा था | फिर कोशिश करता हूँ | आदाब 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 19, 2017 at 7:46pm

आ मोहम्मद आरिफ जी आदाब  ग़ज़ल पर शिरकत करने और हौसला अफजाई करने लिए तहे दिल से शुक्रिया 

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