For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -मतभेद दूर करने’ मकालात चाहिए-कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : आत ; रदीफ़ : चाहिए

बहर : २२१  २१२१  १२२१  २१२

 

मतभेद दूर करने’ मकालात चाहिए

कैसे बने हबीब मुलाक़ात चाहिए |

 

वादा निभाने’ में तुझे’ दिन रात चाहिए

हर क्षेत्र में विकास का’ इस्बात चाहिए |

 

आतंकबाद पल रहा’ है सीमा’ पार में

जासूसी’ करने’ एक अविख्यात चाहिए |

 

तू लाख कर प्रयास नही पा सकेगा’ रब

भगवान को विशेष मनाजात चाहिए |

 

लातों के’ भूत मानता कब सौम्य बात को

आतंक का अनीफ मकाफ़ात चाहिए |

 

परिवार शह्र में जो भी बेघर हैं’ घर मिले

तब शह्र में अनेक मकानात चाहिए |

 

मदहोश हैं चुनाव ख़ुशी में, मगन सभी

हर गाँव एक एक खराबात चाहिए |

 

नेतायों’ को सुधारने के वास्ते बना

इस कोर्ट का कठोर अशनिपात चाहिए |

शब्दार्थ 

मकालात=गूफ्तगू ,बातचीते  ( ब ब )

इस्बात= सबूत

अविख्यात =जो ख्याति प्राप्त न हो

मनाजात=ईश प्रार्थना, पूजा

अनीफ –तेज; मकाफात- प्रतिकार

मकानात-मकान (ब ब )

खराबात=मयखाना

अशनिपात=वज्रपात\

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 240

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 24, 2017 at 8:47pm

आ समर कबीर साहिब आदाब , जी एडिट कर देता हूँ |

Comment by Samar kabeer on December 24, 2017 at 3:04pm

जनाब कालीपद प्रसाद जी आदाब, इस ग़ज़ल को ऐडिट करें,और अर्थ अंत में लिखें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 24, 2017 at 1:30pm

आ. भाई कालीपद जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 24, 2017 at 11:23am

आ मोहम्मद आरिफ जी आदाब , मैं शब्दार्थ आखिर में ही लिखता था , मैंने सोचा साथ में लिखने सी पढने में आसानी होगी |  खैर ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति के लिए तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by Mohammed Arif on December 24, 2017 at 8:01am

आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब,

                                  सामयिक शे'र से भरपूर बेहतरीन ग़ज़ल । दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । शब्दार्थ आपको ग़ज़ल समाप्ति उपरांत लिखने थे । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी, आपको सपरिवार जनम दिन की हार्दिक बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं। प्रभु आपकी…"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ दिए ...
"आदरणीय vijay nikore  जी सृजन आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया का दिल से आभारी है।"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post उजला अन्धकार..
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सृजन आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया का दिल से…"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएँ ...
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सृजन आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया का दिल से…"
1 hour ago
Usha Awasthi posted a blog post

धुआँ-धुआँ क्यों है?

ये आसमां धुआँ-धुआँ क्यों है? सुबू शाम बुझा-बुझा क्यों है? इन्सां बाहर निकलने से डर रहा है बीमारियों…See More
8 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल: वक़्त की शतरंज पर किस्मत का एक मोहरा हूँ मैं।
"वाह ... धाकड़ है आपकी ग़ज़ल धाकड़ जी ... हर शेर जैसे धड़कता हुआ दिल ... जिंदाबाद ... जिंदाबाद ..."
11 hours ago
दिगंबर नासवा commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"वाह ... कुछ शेर तो कमाल हैं ... दूर की बात कहते हुए ... बहुत बधाई इस ग़ज़ल की ..."
11 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"एक अच्छा प्रयास है आपका ... मेरी बहुत बधाई ..."
11 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"वाह ... बेहतरीन ग़ज़ल ... दिली दाद कबूल फरमाएं ..."
11 hours ago
Swastik Sawhney added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

Let's Work for our Soul

Let's Work for our Soul Deplorable, Devastating, Disheartening their condition was. Garbage, Dirt,…See More
11 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दिल से शुक्रिया मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब."
11 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"इन आशीर्वचनों के लिए ह्रदयतल से आपका आभार आ० सौरभ भाई जी."
11 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service