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समता दीपक जलना होगा

राजनीति करते वोटों की

कुत्सित चाल चला करते

अपना स्वार्थ सिद्ध करने को

आपस में झगड़ा करते

भीड़ जुटाकर आग उगलते

वाक्-वाण वे चलवाते

धर्म जाति का जहर घोल

भड़काकर नफरत फैलाते

कर दें विफल योजना इनकी

जो जन धन लूटा करते

इन्हें नहीं है प्यार राष्ट्र से

यह अपना ही घर भरते

जाने कितने शकुनि यहाँ पर

अनगिन चालें चलवाते

लड़वाते जन को आपस में

खुद बेदाग निकल जाते

इनके कुटिल प्रयासों को अब

छिन्न-भिन्न करना होगा

लोकतंत्र के मंदिर में

समता दीपक जलना होगा

- उषा अवस्थी

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on February 25, 2018 at 5:06pm
शुक्रिया समर कबीर जी।
Comment by Samar kabeer on February 25, 2018 at 2:42pm

मोहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,देश प्रेम पर बहुत उम्दा रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Usha Awasthi on February 22, 2018 at 11:20pm
आभार श्याम नारायण जी।
Comment by Shyam Narain Verma on February 22, 2018 at 8:40pm
क्या बात है, बहुत उम्दा हार्दिक बधाई l सादर

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