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रोगी मन का शब्दों से उपचार नहीं होने वाला

चाहे जितने लेख लिखें हम
और लिखें कितनी कविता
नहीं समझ आती कामी को
अब कोई भी मर्यादा

रोगी मन का शब्दों से
उपचार नहीं होने वाला
सद्गुण , संस्कार के बिन
उद्धार नहीं होने वाला

सुकृति , लोक , परलोक सभी
लोगों को तो लगते झूठे
इन्द्रिय जन्य भोग सांसारिक
को ही सत्य समझ बैठे

भूल गए सब थर्म - कर्म
है बिसर गई सारी शुचिता
सत्कर्मों की उड़ीं धज्जियाँ
नहीं बची कोई शुभता

अभिभावक भी नहीं देखते
उनके बच्चे क्या करते ?
धन ऐश्वर्य कमाने की धुन में
दिन - रात लगे रहते

बना रहे कामुक लोगों को
फिल्म , सीरियल , विज्ञापन
सीमा में यदि रह न सके
भारी क्षति होगी , नहीं सहन

यदि सत्पथ पर चल न सके
तो काम नहीं बनने वाला
निन्दनीय घटनाओं पर
विराम नहीं लगने वाला

उषा अवस्थी
5/405 ,विराम खण्ड ,गोमती नगर ,
लखनऊ ,(उ0 ,प्र0)

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Usha Awasthi on May 6, 2018 at 8:45pm

नीलेश शिवगांवकर जी, हर्ष महाजन जी, बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, समर कबीर जी, मोहम्मद आरिफ़ जी, बबिता गुप्ता जी एवं लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, आप सभी का हार्दिक आभार ।

Comment by Usha Awasthi on May 6, 2018 at 8:43pm

नीलेश शिवगांवकर जी, हर्ष महाजन जी, बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, समर कबीर जी, मोहम्मद आरिफ़ जी, बबिता गुप्ता जी एवं लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, आप सभी का हार्दिक आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 2, 2018 at 11:19am

आ. ऊषा जी, सुंदर कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by babitagupta on May 1, 2018 at 2:20pm

उषा दी,समाज की घोर समस्याओं का,समाधान के शाथ विवरण प्रस्तुत करना,अवर्णनीय,आभार 

Comment by Mohammed Arif on May 1, 2018 at 7:54am

आदरणीया उषा जी आदाब,

                      गहरी चिंता और साथ ही समाधान भी सुझाती बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on April 29, 2018 at 9:30pm

मोहतरमा उषा जी आदाब,बहुत अच्छी रचना है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 29, 2018 at 7:50pm

उत्तम सार्थक सन्देश देती हुई रचना आदरणीया..बधाई

Comment by Harash Mahajan on April 29, 2018 at 2:14pm

आ.उषा जी एक अच्छी रचना के लिए

बधाई ।

सादर ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 29, 2018 at 9:10am

बहुत ख़ूब छंद बद्ध कविता हुई है आ. उषा जी. 
कविता एक सन्देश भी दे रही है जो बहुत महत्वपूर्ण है ..
लय को थोडा और कसा जा सकता है कहीं कहीं ..
इस रचना के लिए  बहुत बहुत बधाई 
सादर 

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