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शांत चेहरे की अपनी होती एक कहानी............

शांत चेहरे पर होती अपनी एक कहानी, 

पर दिल के अंदर होते जज्बातों के तूफान, 

अंदर ही अंदर बुझे सपनों के पंख उडने को फडफडाते, 

पनीली ऑंखों से अनगिनत सपने झांकते 

जीवन का हर लम्हा तितर वितर क्यों होता, 

जीवन का अर्थ कुछ समझ नहीं आता, 

लेकिन इस भाव हीन दुनियां में सोचती, 

खुद को साबित करने को उतावली, 

पूछती अपने आप से, 

सपने तो कई हैं, कौन सा करू पूरा, 

आज बहुत से सवाल दिमाग को झकझोरते, 

खुद से सवाल कर जवाब मांगते, 

जीवन जीने की एक नई दिशा मिले, 

जुवान रोक सकता है जमाना, 

पर सपने देखने पर किसकी लगाम लगी, 

अपने सपनों की ही दुनिया में कल्पना करती........

शांत चेहरे पर होती अपनी एक कहानी. .......

रचना मौलिक व अप्रकाशित है

बबीता गुप्ता

Views: 564

Comment

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Comment by babitagupta on May 14, 2018 at 5:57pm

सराहना और त्रुटियों की तरफ धयानाकर्षित करने के लिए आभार. 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 27, 2018 at 4:26pm

अंतस के भावों का खूबसूरत चित्रण किया महोदया...सादर

Comment by Neelam Upadhyaya on April 25, 2018 at 11:11am

आदरणीय बबीता जी, बढ़िया प्रस्तुति । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on April 24, 2018 at 6:36pm

मोहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें ।

कृपया रचना के साथ उसकी विधा भी लिख दिया करें,ये इस मंच का नियम है ।

Comment by Shyam Narain Verma on April 24, 2018 at 10:29am
सुन्दर सार्थक रचना  ने लिये आपको बधाई ….

कृपया ध्यान दे...

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