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भविष्य के जनक [कविता]

जल्दी चलो माँ,जल्दी चलो बावा,

देर होती हैं,चलो ना,बुआ-चाचा,

बन ठनकर हंसते-मुस्कराते जाते,

परीक्षा फल सुनने को अकुलाते,

मैदान में परिजन संग बच्चों का तांता कतार बद्ध थे,

विराजमान शिक्षकों के माथे पर बल पड़े हुए  थे,

पत्रकफल पा,हंसते-रोते ,मात-पिता पास दौड़ लगते,

 भीड़ छट गई,शिक्षकों के सर से बोझ उतर गये,

तभी,तीन बच्चों के साथ महिला इधर आती दिखती,

हाथ जोडकर,दीनभाव से,फेल होने की मजबूरी जताती,

दुखड़ा सुनाती जाती,आंसू बहते जाते,

मजदूरी करके ,पेट काटकर पढाते,

इतना सुन,मेडम गुस्से भरे लहजे मे कहती-

पढने पर ध्यान नही,पीछे बैठ गप लडाती,

कबूल कर,याचना से झोली फैलाती,

पास हो जाती????,खोटी तकदीर बन जाती,

माथा पकड़,कोसती नसीब को,

नही तो,मेरी तरह 'झाडू=पोछा करूंगी ,

दिलासा देकर समझाया-

सब काम धाम छोड़,थोड़ा ध्यान दो....

मिन्नत करने, गिडगिडानेलगी-

बड़ी मेहरवानी होगी,थोड़ी मेहरबानी आप ही कर दो....

ठीक हैं...ठीक हैं...,कहकर पिंड छुडाती.........

हाथ जोडकर,आशाभरी नजरों से वो,चलती बनी......

तभी,शर्मा मेडम बोल पड़ी,समझाने किसे लगी थी....

अपना माथा पच्ची कर,सिरदर्द बढ़ा रही थी.......

अगर,यही पढ़-लिखकर ,अफसर बन जायेंगे,

तो,हम सब के घर, 'वाईयों के तोते'पद जायेगे,

तर्क सम्मत बात सुन, समर्थन में 'हां में हां'मिलाने लगी,

सोलह आने ये सच हैं-----सोझ आने ये सच हैं.....

सब देख सुन,मैं अवाक से मुंह ताकने लगी सबका,

भावी भविष्य जनक की सोच सुन,माथा ठनक गया......

यही कारण हैं,सामाजिक उद्धार सम्भव ही नही,नामुमकिन हैं,

तभी तो,हालत दशकों पूर्व थे,वो आज भी बने हैं.

मौलिक व अप्रकाशित 

बबीता गुप्ता 

Views: 200

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 7, 2018 at 1:31pm

प्रयास के लिए बधाई । प्रबुद्ध जनों की सलाह का संज्ञान लें ।

Comment by babitagupta on June 6, 2018 at 4:25pm

आदरणीया मेडम जी,कविता की गहराई मेंसमझने के लिए सधन्यवाद.

Comment by Usha on June 4, 2018 at 6:24pm

आदरणीय सुश्री बबीता जी,
भविष्य के जनक, कविता में आज के पढ़े-लिखे वर्ग की संकीर्ण व् स्वार्थ से परिपूर्ण मानसिकता का सुन्दर चित्रण देखने को मिलता है। इस वर्ग का दायित्वहै स्वयं व् अन्य सभी का उत्थान करना परन्तु यह अत्यधिक दुखद है कि ऐसी सकारात्मक सोच गौण है। अति सुन्दर प्रस्तुति मैडम। बधाई।

Comment by babitagupta on June 4, 2018 at 1:50pm

धन्यवाद, सर जी.गल्तियो की तरफ धयानाकर्षित करने के लिए, 

Comment by Mohammed Arif on June 4, 2018 at 10:08am

आदरणीया बबीता गुप्ता जी आदाब,

                                 (1) अतुकांत कविता कहने का भरसक प्रयास ।

                                   (2)  अतुकांत कविता के पैटर्न का अभाव ।

                                   (3) कविता में गद्यात्मकता का प्रयोग

                                    (4) अतुकांत कविता साधते-साधते गद्य शैली में अपनी बात कहने का प्रयास करना ।

         .                                          हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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