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सूर्य उगाने जैसा हो- गीत

जीवन की सूनी राहों में,

मधु बरसाने जैसा हो.

अबकी बार तुम्हारा आना

सचमुच आने जैसा हो.

 

धूप कुनकुनी खिले माघ में,

भीगा-भीगा हो सावन.

बादल गरजें जिसकी छत पर,

बारिश हो उसके आँगन.

 

हो सबकी हर भोर सुनहरी,

संध्या मधुर सुहानी.

देखें मीठे सपने, जिनमें,

सब कुछ पाने जैसा हो.

 

सत्ता के हर गलियारे में,

रहे झूँठ पर पाबन्दी.

सच का हो विस्तार निरंतर,

चाल न हो पाये मंदी.

 

सिंहासन तक जो भी जाये,

दिल की गलियों से गुजरे

भले एक हो उसका वादा,

मगर निभाने जैसा हो

 

नेह-नीर से मन की बगिया,

रहे हमेशा हरी-भरी.

दूर तलक भी नजर न आये,

नफरत भागे डरी-डरी.  

 

खुशियों से झोली भरने को,

हर मानव का कर्म यहाँ.

अन्धकार से भरी गली में,

सूर्य उगाने जैसा हो.

"मौलिक और अप्रकाशित"

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 7, 2018 at 3:32pm

आदरणीय रवि शुक्ला जी हृदय से आभार आपका 

Comment by Ravi Shukla on August 7, 2018 at 12:07am

आदरणीय बसंत कुमार जी बहुत ही अच्छा गीत  लिखा है आपने हार्दिक बधाई स्वीकार करें

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 20, 2018 at 3:55pm

आदरणीया  Neelam Upadhyaya जी हृदय तल से आभार आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 20, 2018 at 3:54pm

आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan   जी हृदय तल से आभार आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 20, 2018 at 3:54pm

आदरणीय  vijay nikore  जी हृदय तल से आभार आपका 

Comment by Neelam Upadhyaya on June 20, 2018 at 2:55pm

" हो सबकी हर भोर सुनहरी,

संध्या मधुर सुहानी.

देखें मीठे सपने, जिनमें,

सब कुछ पाने जैसा हो."
आदरणीय बसंत कुमार जी, नमस्कार। सुन्दर  गीत की प्रस्तुति।  हार्दिक बधाई। 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 19, 2018 at 6:43pm

जनाब बसंत कुमार साहिब , सुन्दर गीत लिखा है आपने, मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |

Comment by vijay nikore on June 19, 2018 at 5:11pm

इस सुन्दर गीत के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 19, 2018 at 3:50pm

आदरणीया Rakshita Singh जी सादर नमस्कार एवं दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 19, 2018 at 3:50pm

आदरणीय  gumnaam pithoragarhi जी दिल से शुक्रिया आपका 

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