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ग़ज़ल (क्या ख़ता कोई रशके क़मर हो गई)

ग़ज़ल (क्या ख़ता कोई रशके क़मर हो गई)
(फाइ लुन _फाइ लुन _फाइ लुन _फाइ लुन)

क्या ख़ता कोई रशके क़मर हो गई |
जो खफा मुझसे तेरी नज़र हो गई |

आँख में तेरी अश्के नदामत न थे
इस लिए हर दुआ बे असर हो गई |

ग़म तबाही का तुमको नहीं है अगर
आँख क्यूँ देख कर मुझको तर हो गई |

ख़त्म शिकवे गिले सारे हो जाएंगे
गुफ्तगू उनसे तन्हा अगर हो गई |

यह करामत हमारे अज़ीज़ों की है
यूँ न उनकी अलग रह गुज़र हो गई |

तुहमते बे वफाई थी दोनों तरफ़
बदगुमानी इसी बात पर हो गई |

मुझको हैरत है उनसे मिला नीम शब
फ़िर भी तस्दीक सबको ख़बर हो गई |

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 1, 2018 at 11:05pm

मुहतरम जनाब विजय निको रे साहिब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by vijay nikore on August 1, 2018 at 2:21pm

हर शेर के लिए दाद देता हूँ....

खासकर यह...

//ग़म तबाही का तुमको नहीं है अगर
आँख क्यूँ देख कर मुझको तर हो गई //

दिल से बधाई , जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 31, 2018 at 10:14pm

जनाब नवीन साहिब  , ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 31, 2018 at 10:14pm

मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 31, 2018 at 10:13pm

जनाब shyam नारायण साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 31, 2018 at 10:12pm

जनाब सुशील सरना साहिब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Naveen Mani Tripathi on July 31, 2018 at 9:42pm

बदगुमानी इसी बात पर  हो गयी 

आ0 तस्दीक अहमद साहब बहुत खूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें 

Comment by Samar kabeer on July 31, 2018 at 6:39pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

Comment by Shyam Narain Verma on July 31, 2018 at 5:35pm
बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को आदरणीय | सादर 
Comment by Sushil Sarna on July 31, 2018 at 3:25pm

वाह आदरणीय वाह बहुत ही खूबसूरत अहसासों को पिरोया है आपने इस बेहतरीन ग़ज़ल में। हार्दिक बधाई।

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