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ग़ज़ल (हम अगर राहे वफ़ा में कामरां हो जाएँगे)

(फाइ ला तुन _फाइ ला तुन _फाइ ला तुन _फाइ लु न)

हम अगर राहे वफ़ा में कामरां हो जाएँगे l
सारी दुनिया के लिए इक दास्तां हो जाएँगे l

आप ने हम को ठिकाना गर न कूचे में दिया
हम भरी दुनिया में बे घर जानेजाँ हो जाएँगे l

बे रुखी जारी रही फूलों से गर यूँ ही तेरी
खार भी तेरे मुखालिफ बागबां हो जाएँगे l

जैसे हम बचपन में मिलते थे किसे था यह पता
मिल नहीं पाएंगे वैसे जब जवां हो जाएँगे l

ज़िंदगी में इस तरह आएंगे महमाँ बन के वो
पहले दिल फ़िर दिल रुबा फ़िर दिल सितां हो जाएँगे l

इतनी जल्दी यह करिश्मा हो गा किस को आस थी
ज़ुल्‍म ढ़ाने वाले मुझ पर महरबां हो जाएँगे l

हम से नफरत करते करते किस को यह मालूम था
वो हमारे दिल में महमाँ नागहां हो जाएँगे l

शमअ तो शब भर जलेगी देखिए इनकी वफ़ा
जल के परवाने मगर पल में धुआँ हो जाएँगे l

कौन बोलेगा भला तस्दीक ज़ुल्मों के ख़िलाफ़ 
आप गर महफिल में गूंगे बे जुबां हो जाएँगे l

काम रां_ कामयाब, दिल सितां _माशूक़
ना गहां _अचानक

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 20, 2018 at 9:38pm

जनाब अफरोज़ साहिब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Afroz 'sahr' on July 20, 2018 at 5:28pm

बहुत खू़ब जनाब क्या कहने वाह,,,,

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 20, 2018 at 7:20am

जनाब भाई  लक्ष्मण धामी साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया l

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 20, 2018 at 6:24am

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुयी है , हार्दिक बधाई ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 19, 2018 at 5:13pm

जनाब गुमनाम साहिब   , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया l

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 19, 2018 at 5:12pm

मुह तरमा नीलम साहिबा, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया l

Comment by gumnaam pithoragarhi on July 19, 2018 at 4:24pm

वाह सर जी वाह बहुत खूब खूब  ........

Comment by Neelam Upadhyaya on July 19, 2018 at 3:55pm

आदरणीय तस्दीक अहमद साहब, नमस्कार । शानदार ग़ज़ल के पेशकश के लिए  मुबारकबाद कुबूल करें।   

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 18, 2018 at 8:59pm

मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आ दाब  , ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया l

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 18, 2018 at 8:59pm

मुहतरम जनाब तेज वीर साहिब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया l

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