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ग़ज़ल (जानेमन मुझको मुहब्बत का ज़माना याद है)

(फाइलातुन _फाइलातुन _फाइलातुन _फाइलुन)


याद है तेरी इनायत, ज़ुल्म ढाना याद है |
जानेमन मुझको मुहब्बत का ज़माना याद है |

हम जहाँ छुप छुप के मिलते थे कभी जाने जहाँ
आज भी वो रास्ता और वो ठिकाना याद है |

भूल बैठे हैं सितम के आप ही क़िस्से मगर
दर्द, ग़म,आँसू का मुझको हर फ़साना याद है|

इस लिए दौरे परेशानी से घबराता नहीं
मुश्किलों में उनका मुझको मुस्कुराना याद है |

घर के बाहर यक बयक सुन कर मेरी आवाज़ को
बिन दुपट्टा तेरा दरवाज़े पे आना याद है |

जान से अपनी गया पा कर इशारा जो तेरा
क्या तुझे अपना सितम गर वो दिवाना याद है|

हुक्म से किस के गिरी तस्दीक बिजली क्या पता
हम को जलता सिर्फ अपना आशियाना याद है |

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 1095

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 6, 2018 at 9:45am

जनाब अजय कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 6, 2018 at 9:44am

जनाब गुमनाम साहिब  , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Ajay Kumar Sharma on July 5, 2018 at 10:52pm

शानदार गजल...

Comment by gumnaam pithoragarhi on July 5, 2018 at 7:29pm

वाह बहुत खूब वाह बात है,,,,,,,,,

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 5, 2018 at 7:20pm

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब  , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 5, 2018 at 7:19pm

जनाब राज़ नवादवी साहिब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 5, 2018 at 5:32pm

बहुत ही खूबसूरत सरस ग़ज़ल कही है आदरणीय..वाह

Comment by राज़ नवादवी on July 5, 2018 at 10:30am

आदरणीय तस्दीक अहमद साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए ढेरों बधाइयां. सादर. 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 5, 2018 at 9:22am

मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आ दाब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Mohammed Arif on July 4, 2018 at 8:38pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,

                                बारिश के रोमाण्टिक मौसम में प्रेमरस में डूबी बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद 

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