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उम्मीद दिल में पल रही है- ग़ज़ल

उनके आने से सांस चल रही है
वर्ना लगता था सांझ ढल रही है


अपनी किस्मत कहाँ थी ऐसी पर
जो  मांगी  थी  दुआ  फल रही है


हौसले  भी  थे  और  यकीं भी था
बुझने वाली थी  शमा जल रही है


वक़्त का क्या है कुछ नहीं मालूम
दिक्क़त आजकल  तो टल रही है


एक  दिन  ख़त्म  होगी  मायूसी
ऐसी उम्मीद  दिल  में पल रही है !!


मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment

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Comment by विनय कुमार on September 25, 2018 at 12:15pm

बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब

Comment by विनय कुमार on September 25, 2018 at 12:15pm

बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी

Comment by Samar kabeer on September 24, 2018 at 11:45am

जनाब विनय कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on September 22, 2018 at 12:17pm

हार्दिक बधाई आदरणीय  विनय कुमार जी।बेहतरीन गज़ल।

एक  दिन  ख़त्म  होगी  मायूसी 
ऐसी उम्मीद  दिल  में पल रही है !!

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