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परवाह- लघुकथा

पूरा ऑफिस इकट्ठा हो गया था, बॉस जूते निकालकर मंदिर में घुसा और गणपति आरती शुरू हो गयी. उसे यह सब ठीक नहीं लग रहा था लेकिन सब आये थे तो उसे भी आना पड़ा. एक किनारे खड़ा वह सोच रहा था कि अगर यहीं किसी और धर्म का व्यक्ति अपनी इबादत शुरू करना चाहे तो क्या ये लोग उसे भी इसी तरह करने देंगे.
चंद मिनटों बाद उसकी नज़र सफाई कर्मचारी हमीदन बी पर पड़ी, वह भी एक तरफ चुपचाप खड़ी थी. उसे बेहद आश्चर्य हुआ, यह उसकी धारणा के उलट था. खैर पूजा संपन्न हुई और प्रसाद देने वाले ने हमीदन बी को भी एक लड्डू और मोदक दिया जिसे उसने बड़े प्यार से अपने खोंचे में बाँध लिया. अब उससे रहा नहीं गया और उसने पूछ ही लिया "अरे हमीदन, तू कबसे पूजा पाठ में आने लगी?".
हमीदन ने साडी का पल्लू संभाला और बोली "साहब, मुझे तो कोई दिक्कत नहीं होती, जैसे हमारा मज़हब वैसे आपका. बस इसी बहाने हम भी उपरवाले को याद कर लेते हैं".
"लेकिन तुम्हारे यहाँ किसी को पता चलेगा तो क्या वह बुरा नहीं मानेगा. मतलब कोई मौलाना ऐतराज़ तो कर सकता है ना", उसने अपनी शंका प्रकट की.
"जब हमारे मरद ने हमको बिना तलाक़ दिए नया घर बसा लिया और किसी ने ऐतराज़ नहीं किया साहब, तो इसमें क्या करेगा", हमीदन ने जाते जाते कहा.
अब उसे अपने पूजा में आने का अफ़सोस हो रहा था.


मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on September 27, 2018 at 7:29pm
लघुकथा पर इस विस्तृत टिपण्णी के लिए बहुत बहुत आभार आ सुशील सरना साहब
Comment by Sushil Sarna on September 27, 2018 at 7:15pm


"जब हमारे मरद ने हमको बिना तलाक़ दिए नया घर बसा लिया और किसी ने ऐतराज़ नहीं किया साहब, तो इसमें क्या करेगा", हमीदन ने जाते जाते कहा. वाह आदरणीय विनय जी वाह बहुत सुंदर बात और कटाक्ष। अति सुंदर लघुकथा का विषय और उस विषय को सार्थक करती पंच लाइन। हार्दिक बधाई।

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on September 27, 2018 at 4:27pm

बढिया कथ्य भाई विनय जी, वर्तमान परिस्थितियों में मानवीय सोच की अलग ही बानगी सामने रखती उत्तम लघुकथा। हार्दिक बधाई भाई जी 

Comment by विनय कुमार on September 26, 2018 at 6:02pm

बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब

Comment by विनय कुमार on September 26, 2018 at 6:02pm

बहुत बहुत आभार आ नीलम उपाध्याय जी

Comment by Samar kabeer on September 26, 2018 at 5:49pm

जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Neelam Upadhyaya on September 26, 2018 at 4:07pm

आदरणीय विनय कुमार जी, नमस्कार. सम-सामयिक  समस्याओं पर अच्छा सन्देश देती सूंदर लघुकथा की प्रस्तुति।  हार्दिक बधाई।

Comment by विनय कुमार on September 26, 2018 at 1:26pm

बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी

Comment by विनय कुमार on September 26, 2018 at 1:26pm
Comment by TEJ VEER SINGH on September 26, 2018 at 9:45am

हार्दिक बधाई आदरणीय विनय जी। बहुत सुन्दर संदेश देती बेहतरीन लघुकथा।

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