For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

'नारियल-पानी' (लघुकथा)

"दुनिया भर में हमारा नाम हो रहा है! लोग हमारी बहुआयामी तरक़्क़ी की बात कर हमसे अपनी तरक़्क़ी साझा करने के लिये लालायित हैं! हम सब कुछ बदल कर एक नये विकसित देश का निर्माण करने जा रहे हैं!"


"ये कैसा देश है रे, जो इतने आत्मविश्वास से यूं गर्वोक्तियां कर रहा है!" एक और नन्हें से महत्वाकांक्षी विकासशील देश ने एक बड़े विकसित देश से कहा।


"आजकल मेरे साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रहा है! ज़रा देखो तो, कितना डिवेलप हो रहा है मेरे ही कर्ज़ से, मेरी ही तकनीकों से और मेरी ही व्यावसायिक-रणनीति से! इसी की मदद चाहिए है हमें उस क्षेत्र के हमारे विशेष दुश्मन-आतंकियों को नेस्तनाबूद करने के लिए और ख़ुद इसको हमारी संस्कृति व धर्म की मुख्य धारा में लाने के लिए, बस!"


"नारियल है... 'ना-रिअल' ! ऊपर से देखने में  नकलची 'बंदर' और उसकी 'थूथन' की तरह लगता है! 'व्यापार' के 'नारियल-पेड़' तुम जैसे बड़े देशों ने दुनिया के ऐसे मुल्कों में लगाये और 'असली ताज़े' हरे-भरे 'नारियलों' का सेवन भी तुम ही कर रहे हो!" उस विकसित देश की बात पर उस छोटे विकासशील देश ने कटाक्ष किया - "सुना है कि अंदर ही अंदर यह ज़हरीला सा हो रहा है! इसके 'गूदे (गरी)' और 'पानी' में वैसी गुणवत्ता नहीं रही और सुख-शांति और उदारता रूपी इसके सफ़ेद 'गूदे' का 'रंग' 'पीला' सा होकर किसी और 'विशेष रंग' में ढलता जा रहा है अपनी असली तासीर खोकर!"


"उससे हमें क्या? यह उसका अपना अंदरूनी मामला है! हमें तो हमारे हाथों के इशारे पर चलने वाली कठपुतलियों की ज़रूरत है ऐसे ज़रूरतमंद जोशीले क्षेत्रों में!" विकसित देश ने अपने महंगे 'शूट' की महंगी 'टाई' खींचते हुए उस विकासशील देश के कंधे पर हाथ डालते हुए कहा - "तुम मेरे नये दोस्त हो! नन्हे भले हो, लेकिन इससे बेहतर हो! मेरी तरह तुम भी इस पर कड़ी नज़र रखो और इसके संग व्यवहार और व्यापार बढ़ाओ! जैसा हम कहें, वैसा करते जाओ, बस! मेरे साथ-साथ तुम्हारे भी वारे-न्यारे हो जायेंगे इसके नेताओं और उद्योगपतियों के मार्फ़त!"


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 161

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 5, 2018 at 10:33pm

मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर अपना क़ीमती वक़्त देकर अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर  साहिब।

Comment by Samar kabeer on October 2, 2018 at 12:05pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 29, 2018 at 3:21pm

आदाब। कृपया अंतिम संवाद की तीसरी पंक्ति में 'शूट' के स्थान पर सही शब्द 'सूट' पढ़िएगा। शुक्रिया।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Pratibha Pandey posted a blog post

काश हम हवा होते

कुछ तो बात है इन हवाओं में जो तुम्हें छूकर आ रही हैं ,बताती हैं वो कशिश जो तुमसे मिलकर महसूस होती…See More
3 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
3 hours ago
Ram Ashery posted a blog post

न्याय की उम्मीद

जो डूब चुका है कंठ तक झूठ के सवालों में उससे ही हम न्याय की उम्मीद लगा बैठे ।  देश आज फंस चुका है…See More
3 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब ,आपके आशीर्वचनों से कृतकृत्य हुआ ,सृजन सार्थक हुआ ,सादर आभार…"
14 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post आडंबर - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी। आदाब।"
20 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post सीख - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी। आदाब।"
20 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रस्सा-कशी खेल था जीवन(५८ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, अच्छा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार…"
21 hours ago
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post सीख - लघुकथा -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
21 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मुझको तेरे रहम से…"
21 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ऐ पवन ! ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,प्रस्तुति अच्छी है,बधाई स्वीकार करें । एक बात पहले भी आपको आपकी किसी कविता…"
21 hours ago
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post सांच को आंच नही
"जनाब प्रदीप जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,बहरहाल बधाई स्वीकार करें ।"
22 hours ago
Samar kabeer commented on amita tiwari's blog post इतिहास अदालत होती है क्या
"मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
22 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service