For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज फिर बापू को हमने याद दिल से कर लिया ।

और सारे साल फिर इनसे किनारा कर लिया ।।

 

फूल चरणों में चढ़ाकर सोचते सब ठीक है ।

रूप बगुले का बशर ने फिर तिबारा कर लिया।।

 

परचम-ए-खादी तिरंगे  में लिपटकर कह रहा ।

मेरे ही मुंसिफ़ ने मुझसे  किनारा कर लिया ।।

 

देखकर रंग-ए-फिज़ा  हैरां मैं  हर दिन हो रहा ।

कैसे खोटे ने खरे को भी नकारा कर लिया।।

 

सुन के भी जब अनसुनी करने लगे अपने ही लोग ।

हो व्यथित बापू ने जग से ही किनारा कर लिया ।।

ज़्यादा की चाहत कभी की ही नहीं उसने' प्रदीप' 

उसने अपना तो फ़कीरी में गुज़ारा कर लिया 

-प्रदीप भट्ट-

मौलिक एवं अप्रकाशित -

Views: 586

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on October 6, 2018 at 5:41pm

'हो व्यथित बापू ने जग से ही किनारा कर लिया' ये पंक्ति ठीक है,ग़लती से कोट हो गई ।

Comment by Samar kabeer on October 6, 2018 at 5:39pm

'मेरे ही मुंसिफ़ ने मुझसे  किनारा कर लिया'

ये पंक्ति अभी बह्र में नहीं है,इसे यूँ कर सकते हैं:-

'मेरे ही मुन्सिफ़ ने मुझसे क्यों किनारा कर लिया'

'कैसे नक्कालों ने अपने बस में ख़ालिस कर लिया'

इस पंक्ति में क़ाफ़िया नदारद है?

'हो व्यथित बापू ने जग से ही किनारा कर लिया'

इस पंक्ति में 'ही' शब्द अधिक होने से बह्र से ख़ारिज है 'ही' शब्द हटा दें ।

बाक़ी ठीक है ।

Comment by प्रदीप देवीशरण भट्ट on October 6, 2018 at 12:41pm

जनाब समर साहिब 

आपका आदेश सिर माथे 

लीजिए दुरुस्त कर दिया।

Comment by Samar kabeer on October 3, 2018 at 2:58pm

जनाब प्रदीप भट्ट साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा ।

मतला और उसके बाद के शैर में रदीफ़ 'लिया' है और बाक़ी तीन अशआर में रदीफ़ "दिया" हो गई है,ग़ौर करें ।

'परचम-ए-खादी तिरंगे  में लिपटकर कह रहा '

तिरंगा भी परचम है,"परचम-ए खादी" से क्या कहना चाहते हैं?स्पष्ट नहीं ।

देखकर रंग-ए-फिज़ा  मैं हैरान हर दिन हो रहा ।

जो असल थे उनको नक्कालों ने नकारा कर दिया

ये शैर बह्र में नहीं है,क़ाफ़िया भी 'नकारा' ग़लत है,सहीह शब्द है "नाकारा" ।

सुन के भी अनसुनी करने लगे अपने ही लोग ।

हो व्यथित बापू ने जग से ही किनारा कर लिया

ये शैर भी बह्र से ख़ारिज है, देखियेगा ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 2, 2018 at 7:47pm

कालजयी राष्ट्रहित, सामाजिक सरोकार के संदेश देने वाले महान व्यक्तित्व राष्ट्रपिता बापू जी का पुण्य स्मरण कराती, उनकी रूह का दर्द बयां करती बढ़िया रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें। शेर का शेर के रूप में पूरा होना और एक…"
1 hour ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"उदाहरण ग़ज़ल और उदाहरण क़ाफ़िया को देखें उससे क़ाफ़िया "आना" निर्धारित होता है जबकि…"
2 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"इस मंच पर ग़ज़ल विधा पर जितनी चर्चा उपलब्ध है उसे पढ़ना भी महत्वपूर्ण है। इस पर विशेष रूप से ध्यान…"
2 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"धन्यवाद ऋचा जी।  गिरह ख़ूब हुई // आप भी मनजीत जी की तरह फ़िरकी ले रहीं हैं। हा हा "
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय अजेय जी नमस्कार  बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई आपकी बधाई स्वीकार कीजिए  गिरह ख़ूब…"
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीया मनप्रीत जी  बहुत शुक्रिया आपका हौसला अफ़ज़ाई के लिए  सादर "
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय अजेय जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका  सादर "
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीया मनप्रीत जी नमस्कार  बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई आपकी बधाई स्वीकार कीजिए  चौथे शेर का ऊला…"
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय जयहिंद जी  ग़ज़ल का अच्छा प्रयास किया आपने बधाई स्वीकार कीजिए  गुणीजनों की…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"दिल दुखाना नहीं कि तुझ से कहेंहै फसाना नहीं कि तुझ से कहें गांव से दूर घर बनाया हैहै बुलाना नहीं…"
17 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"धन्यवाद आदरणीय "
21 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रणाम भाई अखिलेश जी, क्या ही सुंदर चौपाईयां हुईं हैं। वाह, वाह। फागुन का पूरा वृतांत कह दिया…"
21 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service