For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ये क्या हो रहा मेरे प्यारे शहर को,

कहीं क़त्ल-ओ-गारत कहीं ख़ून के छीटें,

के घायल हैं चंदर कहीं पे सिकंदर,

के हर ओर फैले हुए अस्थि पंजर,

के तुम ही कहो कैसे देखूँ ये मंजर,

के आँखों के सूखे पड़े हैं समंदर ।।

 

ये किसकी नज़र लग गई इस चमन को,

ये क्या हो रहा है शहर के अमन को,

के हाथों मे शमशीर सब हैं उठाये,

है क्या माजरा कोई कुछ तो बताये,

के अटकी हैं साँसे मेरी कब से अंदर,

नहीं देखता कोई मस्जिद या मंदर,।।

                             

ये किसने बिगाड़ी फिज़ा इस शहर की,

के हर रात बीती है अपनी कहर की,

ये किसके इशारे पे सब हो रहा है,

बशर से लिपटकर बशर रो रहा है,

दिलों मे उठेंगे अगर यूँ बवंडर,

मकां  न बचेंगे दिखेंगे बस खंडहर।।

                                                               

हमें प्यार हैं अपने प्यारे वतन से

संभाली है हमने विरासत जतन से

गुनाह दर गुनाह सब किए जा रहे हैं

ये नस्लों को हम क्या दिये जा रहे हैं

के हाथों मे सबको दिये किसने खंजर

के सरहद के उस पार का है कलंदर।। 

-प्रदीप भट्ट- (मौलिक एवं अप्रकाशित)               

Views: 135

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on October 14, 2018 at 6:53pm

जनाब प्रदीप भट्ट साहिब आदाब,नज़्म का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

कुछ बातें आपकी जानकारी में लाना चाहूँगा ।

सहीह शब्द--,"शह्र-क़ह्र--अम्न--मन्दिर हैं देखियेगा ।

'के सरहद के उस पार का है कलंदर'

इस पंक्ति में "क़लन्दर" शब्द भर्ती का है ।

Comment by V.M.''vrishty'' on October 13, 2018 at 2:49pm
आदरणीय प्रदीप जी, अभिवादन! समसामयिक एवं सत्य को उजागर करती बेहतरीन कविता। बहुत बधाई!
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 13, 2018 at 1:23pm

आद0 प्रदीप भट्ट जी सादर अभिवादन। बढिया कविता लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post प्रश्न-गुंथन
"बहुत सुंदर सृजन आदरणीय विजय निकोर जी .... अंतर्मन गांठे खोलता अनुपम सृजन। ... हार्दिक बधाई सर।"
2 hours ago
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"'उससे ज्यूँ ही नज़र मिली यारो'   वाह सर जी ।  बहुत बहुत धन्यवाद "
4 hours ago
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"//उस से इक पल निगाह टकराई // इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:- 'उससे ज्यूँ ही नज़र मिली यारो'"
7 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion
7 hours ago
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अजय तिवारी जी "
9 hours ago
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"आदाब समर सर जी । ग़ज़ल की सरहना के शुक्रिया । ये मिसरा ऐसे ठीक रहेगा क्या    ' उस से…"
9 hours ago
मोहन बेगोवाल posted a blog post

है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए।

है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए। मुनीर जब किया दीया न रौशनी के लिए।बताई जो मेरी माँ ने वही तो…See More
10 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
12 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"बहुत बहुत आभार Amit Kumar "Amit"  जी उत्साहवर्धन के लिए "
yesterday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़म को क़रीब से कभी देखा है इसलिए(५१)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय  Samar kabeer साहेब |  सलामत रहें | "
yesterday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted photos
yesterday
Sushil Sarna posted a photo
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service